हाइड्रोजन बम : डोनाल्ड ट्रंप के दावे ने दुनिया को चौंकाया — चीन और पाकिस्तान पर आरोप कि वे चुपचाप परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। सवाल ये कि क्या अब भारत भी अपने थर्मोन्यूक्लियर टेस्ट को लेकर कोई बड़ा कदम उठा सकता है ।

अगर दुनिया का नक्शा उठाकर देखा जाए, तो कुछ ही देश हैं जिनके पास परमाणु हथियार हैं, अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, भारत, पाकिस्तान, इज़रायल और उत्तर कोरिया। यही वो नौ देश हैं जो धरती पर किसी भी समय पलक झपकते ही सब कुछ बदल देने की ताकत रखते हैं। लेकिन हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने इन देशों के बीच नई हलचल पैदा कर दी है।
ट्रंप ने दावा किया है कि चीन और पाकिस्तान दुनिया की नज़रों से छिपकर परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने तो यह भी कहा कि ” रूस और नॉर्थ कोरिया भी इसी दिशा में सक्रिय हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रंप ने अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन को खुद भी परमाणु परीक्षण के लिए तैयार रहने के आदेश दे दिए थे।”
ट्रंप के बयान के बाद बढ़ी उम्मीदें
अब जब ट्रंप ने खुद कहा कि “चीन और पाकिस्तान जैसे देश छिपकर परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह भारत के लिए एक बड़ा मौका बन सकता है। सूत्रों के अनुसार, भारत के पास अब यह “सामरिक अवसर” है कि वह अपने हाइड्रोजन बम की क्षमता को साबित करे या उस पर काम आगे बढ़ाए। यह वही मौका है जिसकी तैयारी भारत ने पोखरण के बाद से ही दिमाग में रखी थी बस अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों की वजह से खुलकर कुछ नहीं किया गया।
पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ी
पाकिस्तान इस खबर से सबसे ज्यादा असहज है। वहां के पूर्व राजदूत अब्दुल बासित ने कुछ समय पहले चेतावनी दी थी कि भारत जल्द ही हाइड्रोजन बम का परीक्षण कर सकता है। उनका कहना था कि “अगर ऐसा हुआ, तो पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति बेहद कठिन हो जाएगी।”
असल में हाइड्रोजन बम, पारंपरिक परमाणु बम से कई गुना ज़्यादा विनाशकारी होता है। इसकी एक ही धमक लाखों टन TNT के बराबर होती है। इसलिए अगर भारत ने यह साबित कर दिया कि वह H-बम रखने की स्थिति में है, तो यह पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए चेतावनी होगी। यही वजह है कि पाकिस्तान इस बयान के बाद बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर “दक्षिण एशिया में असंतुलन” की बात उठा रहा है।

पोखरण-II 1998 क्या हैं
भारत के लिए ट्रंप का यह दावा किसी “स्ट्रेटेजिक सिग्नल” से कम नहीं है। भारत के पास परमाणु हथियार तो हैं, लेकिन हाइड्रोजन बम (थर्मोन्यूक्लियर बम) की क्षमता पर अब तक सवाल उठते रहे हैं।
पोखरण-II (1998) को याद कीजिए , जब भारत ने पाँच धमाके कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। तब देश ने ऐलान किया था कि उनमें से एक परीक्षण हाइड्रोजन बम का भी था। पर बाद में कुछ वैज्ञानिकों ने कहा कि यह परीक्षण पूरी तरह सफल नहीं था, यानी बम की क्षमता उम्मीद के मुताबिक नहीं निकली।
डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक के. संथानम ने भी 2009 में यह कहा था कि “उस समय हुआ हाइड्रोजन बम टेस्ट “कमज़ोर” था और उससे भारत के सामरिक लक्ष्य पूरे नहीं हो सकते। हालांकि तत्कालीन परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष राजगोपाल चिदंबरम ने इस दावे को गलत ठहराया था और कहा कि टेस्ट पूरी तरह सफल रहा। लेकिन तब से अब तक यह सवाल बना हुआ है। क्या भारत के पास सच में तैयार हाइड्रोजन बम है या नहीं?
परमाणु राजनीति
अब जरा ये भी देखें। दुनिया ने 1990 के दशक के बाद यह मान लिया था कि “कोल्ड वॉर” की तरह परमाणु परीक्षणों का दौर खत्म हो चुका है। 1996 में एक समझौता हुआ था। CTBT (Comprehensive Nuclear Test Ban Treaty) जिसमें ज़्यादातर देशों ने वादा किया कि अब नए परीक्षण नहीं होंगे। भारत और पाकिस्तान ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए, लेकिन 1998 के बाद दोनों देशों ने खुद ही परीक्षण रोक दिए।
दुनिया के बाकी देशों का क्या हाल?
- अमेरिका और रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं — 5,000 से भी ज्यादा वॉरहेड्स।
- चीन अपने न्यूक्लियर आर्सेनल को तेजी से बढ़ा रहा है और अब तीसरे सबसे बड़े भंडार की ओर बढ़ रहा है।
- नॉर्थ कोरिया हर साल नए परीक्षण की धमकी देता है।
- इजरायल ने कभी खुलकर स्वीकार नहीं किया, लेकिन उसके पास भी कई थर्मोन्यूक्लियर हथियार होने का अनुमान है।
भारत के लिए रणनीति क्या हो सकती है?
भारत आज एक ज़िम्मेदार परमाणु शक्ति है। वह खुद को हमेशा एक “शांतिप्रिय राष्ट्र” के रूप में पेश करता आया है। लेकिन सामरिक मजबूती के लिए वैज्ञानिक तैयारी और तकनीकी विकास भी ज़रूरी हैं। आज की दुनिया में असली ताकत सिर्फ बम फोड़ने में नहीं, बल्कि अपनी टेक्नोलॉजी और डिटरेंस को बनाए रखने में है।
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