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भारत के एक कदम से ही पाकिस्तान में आ रहा है भयानक सूखा और बाढ़ ! ऑस्ट्रेलियाई रिपोर्ट का खुलासा

सिंधु जल संधि के निलंबन

भारत द्वारा सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान गहरे जल संकट में रिपोर्ट में दावा – भारत के पास अब नदी प्रवाह नियंत्रित करने की पूरी क्षमता, छोटे बदलाव से भी पड़ सकता है पड़ोसी मुल्क पर बड़ा असर।

सिंधु जल संधि के निलंबन

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर जारी तनाव के बीच अब एक नई रिपोर्ट ने पाकिस्तान की परेशानी और बढ़ा दी है। यह रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP)ने जारी की है। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि पाकिस्तान का जल भविष्य अब भारत के फैसलों पर निर्भर है और मौजूदा स्थिति में पड़ोसी मुल्क गहरे संकट में है।

रिपोर्ट ने जगाई पाकिस्तान की चिंता

सिडनी स्थित IEP द्वारा जारी ‘ Ecological Threat Report 2025 ’ में बताया गया है कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद पाकिस्तान गंभीर जल संकट से गुजर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की करीब 80 प्रतिशत खेती सिंधु नदी के पानी पर निर्भर है। इस समय पाकिस्तान के कई इलाकों में सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी हो गई है और किसान फसलें बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

भारत ने 1960 में हुई इस ऐतिहासिक संधि के तहत पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान के साथ साझा करने की सहमति दी थी। वहीं, भारत ने व्यास, रावी और सतलुज जैसी पूर्वी नदियों पर नियंत्रण बनाए रखा था। लेकिन भारत द्वारा समझौते को स्थगित करने के बाद अब यह बाध्यता खत्म हो गई है, जिससे उसे नदी प्रवाह प्रबंधन में अधिक स्वतंत्रता मिल गई है।

भारत को मिला रणनीतिक फायदा

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करके अपने पक्ष में एक बड़ा रणनीतिक हथियार हासिल कर लिया है। भारत पूरी तरह से पानी का प्रवाह रोक तो नहीं सकता, लेकिन वह बांधों के संचालन समय और पानी के प्रवाह दिशा में छोटे-छोटे बदलाव कर सकता है, जिनका पाकिस्तान पर गंभीर असर पड़ता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि “भारत तकनीकी रूप से अब सक्षम हो चुका है कि वह सिंधु नदी के प्रवाह को नियंत्रित कर सके।” अगर भारत चाहे तो गर्मी के मौसम में पानी छोड़ने का समय थोड़ा बदलकर भी पाकिस्तान के खेतों में सूखा जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान के पास सिर्फ 30 दिन का जल भंडारण करने की क्षमता है। इससे ज्यादा वक्त तक पानी न मिले तो वहां की फसलें सूख सकती हैं और पीने के पानी की समस्या भी बढ़ सकती है।

सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद की स्थिति

भारत द्वारा इस समझौते को निलंबित करने का फैसला पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया था। इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया और भारत ने ‘ ऑपरेशन सिंदूर ’ चलाकर पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया। इसके बाद जब सिंधु जल समझौता अस्थायी रूप से रोका गया, तो पाकिस्तान की जल व्यवस्था डगमगाने लगी।

IEP रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सरकार अब नदियों के प्रवाह को लेकर लगातार चिंता में है। रिपोर्ट में कहा गया है कि “भारत की पश्चिमी नदियों पर बने बांध भले ही रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट हैं, यानी वे ज्यादा पानी नहीं रोकते, लेकिन भारत के पास गेट खोलने-बंद करने का अधिकार है। यह अधिकार ही पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।”

छोटे बदलाव से बड़ा असर

रिपोर्ट में उदाहरण देकर बताया गया है कि हाल ही में जब भारत ने चिनाब नदी पर जल निकासी की, तो पाकिस्तान को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। इसके चलते पहले नदी का एक हिस्सा सूख गया और बाद में जब गेट खोले गए तो गाद से भरा तेज बहाव आया, जिसने आसपास के इलाकों में तबाही मचा दी। यह दर्शाता है कि भारत के छोटे से निर्णय से भी पाकिस्तान के निचले इलाकों में स्थिति बिगड़ सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सिंधु बेसिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसकी नदियों से न सिर्फ खेती चलती है, बल्कि लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी भी जुड़ी है। ऐसे में अगर भारत लगातार अपने बांधों से पानी के प्रवाह का समय और मात्रा नियंत्रित करता रहा, तो पाकिस्तान को आने वाले वर्षों में खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।

पाकिस्तान के पास सीमित विकल्प

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के पास अब बहुत सीमित रास्ते बचे हैं। उसके जलाशयों की क्षमता बहुत कम है और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से वे जल्दी भर जाते हैं या सिल्ट जमा होने से कम उपयोगी रह जाते हैं। नए जलाशयों के निर्माण में समय और धन दोनों की कमी है। वहीं, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घटते सहयोग के चलते वहां जल प्रबंधन को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बन पा रही है।

IEP की रिपोर्ट का यह भी कहना है कि अगर भारत चाहे तो अपने नए जल परियोजनाओं के जरिए पश्चिमी नदियों के प्रवाह को कुछ समय तक मोड़ सकता है, जिससे पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांतों में पानी की भारी कमी हो सकती है। यही वजह है कि पाकिस्तान इस रिपोर्ट से बेहद बेचैन और चिंतित है।

भारत की स्थिति मजबूत

भारत की ओर से प्रोजेक्ट्स जैसे किशनगंगा और बगलिहार बांध पहले से चल रहे हैं। भारत ने तकनीकी रूप से इन प्रोजेक्ट्स को इस तरह बनाया है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किए बिना भारत को अधिक जल उपयोग का लाभ दें। इसीलिए ऑस्ट्रेलियाई रिपोर्ट में कहा गया कि “भारत आज सिंधु प्रणाली पर नियंत्रण की स्थिति में है, जबकि पाकिस्तान अपनी पुरानी नीतियों और अक्षमता की वजह से संकट में फंस चुका है।”

भविष्य की चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में अगर पाकिस्तान ने जल प्रबंधन और भंडारण प्रणाली को सुधारने के कदम नहीं उठाए, तो वह एक “जल अभावग्रस्त राष्ट्र”बन सकता है। वहीं, भारत को भी इस मुद्दे को सावधानी से संभालने की जरूरत है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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