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अस्पताल बना कब्रिस्तान ! सूडान के अस्पताल में घुसकर 450 लोगों को मार डाला, क्या है सूडान के गृह युद्ध की कहानी ?

सूडान संकट WHO ने जताया गहरा शोक

सूडान के अल-फ़शर शहर में RSF के कब्जे के बाद सऊदी प्रसूति अस्पताल में 460 से अधिक लोगों की मौत हो गई।

WHO ने इस त्रासदी को मानवीय आपदा बताया है।

दारफुर में जारी गृहयुद्ध ने हालात को और भयावह बना दिया है। जानिए पूरी रिपोर्ट — कैसे सूडान जंग के आगोश में फंस गया।

 

सूडान एक बार फिर खूनी संघर्ष की आग में झुलस रहा है। पश्चिमी दारफुर के अल-फ़शर शहर में स्थित सऊदी प्रसूति अस्पताल में 460 से अधिक लोगों की मौत ने पूरे विश्व को हिलाकर रख दिया है। बताया जा रहा है कि यह घटना उस समय हुई जब सूडान के अर्धसैनिक बलों रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़ (RSF) ने हाल ही में इस अस्पताल पर कब्जा कर लिया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने इस भीषण त्रासदी पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने कहा कि WHO इस घटना से ‘ स्तब्ध और गहरे सदमे में ‘ है। संगठन ने इस घटना को मानवीय आपदा बताया है, जो पहले से ही युद्ध की मार झेल रहे सूडान के लोगों के लिए एक और बड़ा झटका है।

अल-फ़शर बना जंग का मैदान

अल-फ़शर दारफुर क्षेत्र की राजधानी है और पिछले एक साल से यह क्षेत्र लगातार लड़ाई का केंद्र बना हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, 500 से ज्यादा दिनों की घेराबंदी के बाद, ‘ रैपिड सपोर्ट फोर्स ‘ ने हाल ही में शहर पर पूरी तरह कब्जा कर लिया। शहर के कई इलाकों में बमबारी और गोलीबारी की आवाजें आम हो गई हैं। इसी दौरान, सऊदी प्रसूति अस्पताल जो पहले से ही घायल और बीमार लोगों से भरा था। अचानक हिंसा के बीच फंस गया। वहां मौजूद सैकड़ों मरीज और उनके परिजन मारे गए।

सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में पानी, बिजली और दवाइयों की भारी कमी थी। लड़ाई के दौरान कई डॉक्टर और नर्सें भी घायल हुईं या लापता हैं।

WHO की चिंता और बयान

WHO प्रमुख टेड्रोस अदनोम ने कहा, “हमें जानकारी मिली है कि अल-फ़शर के सऊदी प्रसूति अस्पताल में 460 से अधिक मरीजों और उनके साथियों की मौत हो गई है। यह सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि हर एक जान के पीछे एक परिवार, एक कहानी और एक भविष्य था। अदनोम ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि सूडान में मानवीय सहायता पहुंचाने के रास्ते खोले जाएं और दोनों पक्ष तुरंत हिंसा रोकें।

रेड क्रॉस के वॉलंटियर्स पर भी हमला

इस बीच, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रीसेंट सोसाइटीज (IFRC) ने भी एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। संघ ने बताया कि सूडान में उनके ‘ 5 वॉलंटियर्स मारे गए ‘ और ‘ तीन अन्य लापता हैं। ‘हालांकि, उनकी हत्या कैसे हुई और किसने की, इसका अब तक पता नहीं चल सका है। IFRC ने कहा कि “वे बेहद भयभीत हैं और अपने सदस्यों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। संगठन ने दोनों पक्षों से अपील की है कि मेडिकल कर्मियों और राहतकर्मियों को निशाना न बनाया जाए।”

कैसे शुरू हुआ गृहयुद्ध

सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच गृहयुद्ध जारी है। यह संघर्ष शुरू हुआ था जब देश के सैन्य शासन में शामिल दो प्रमुख नेताओं जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान (सूडानी सेना प्रमुख) और मोहम्मद हमदान दगालो (RSF प्रमुख) के बीच सत्ता को लेकर टकराव हुआ। धीरे-धीरे यह टकराव पूर्ण गृहयुद्ध में बदल गया, जिसने राजधानी खार्तूम से लेकर दारफुर तक सब कुछ तबाह कर दिया।अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक 15,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, और 50 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

दारफुर की मानवीय स्थिति बेहद गंभीर

दारफुर क्षेत्र पहले से ही कई वर्षों से संघर्ष का केंद्र रहा है। यह इलाका सूडान के सबसे गरीब और पिछड़े हिस्सों में से एक माना जाता है। युद्ध से पहले भी यहां गरीबी, भूख और हिंसा की स्थिति बनी रहती थी, लेकिन अब हालात और भी बदतर हो गए हैं।

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार —

अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं खत्म हो गई हैं, दवाइयों की आपूर्ति बंद है,घायल लोगों को मदद नहीं मिल पा रही। कई परिवार अपने प्रियजनों के शव तक नहीं खोज पा रहे हैं। अस्पतालों में जगह की कमी के कारण शवों को अस्थायी रूप से गलियारों और बरामदों में रखा जा रहा है।

दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप

सूडानी सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़ दोनों ही इस हिंसा के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। सेना का कहना है कि ” RSF ने जानबूझकर नागरिक इलाकों पर हमला किया, जबकि RSF का आरोप है कि सेना ने अस्पताल को ‘ सैन्य ठिकाना ‘ बना लिया था। सच क्या है, यह कहना मुश्किल है, क्योंकि इलाके में पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की पहुंच लगभग नामुमकिन है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, और अफ्रीकी संघ ने इस घटना की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि “स्वास्थ्य संस्थानों को युद्ध का हिस्सा बनाना मानवता के खिलाफ अपराध है।”अमेरिका और ब्रिटेन ने भी हिंसा रोकने के लिए दोनों पक्षों पर दबाव डालने की बात कही है। हालांकि, अब तक कोई ठोस शांति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।

आम लोगों की दयनीय स्थिति

दारफुर से आने वाली तस्वीरें बेहद दर्दनाक हैं। लोग अपने बच्चों को लेकर शहर छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन रास्ते बंद हैं। खाने और साफ पानी की भारी कमी है। शरणार्थी शिविरों में भीड़ बढ़ने से बीमारियां फैलने लगी हैं। कई मां बिना दवा और डॉक्टर के बच्चों को जन्म दे रही हैं। WHO के अनुसार, अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में बीमारियों और भुखमरी से मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है।

शांति की उम्मीद आख़िर कब?

सूडान में युद्धविराम की अपीलें पहले भी कई बार की गईं, लेकिन हर बार कुछ ही दिनों में टूट गईं। लोग अब थक चुके हैं, और उन्हें लगता है कि दुनिया उनकी आवाज़ नहीं सुन रही। दारफुर अस्पताल की यह घटना सूडान में चल रही मानवीय त्रासदी की एक झलक भर है। हर दिन वहां सैकड़ों लोग हिंसा, भूख और बीमारियों की वजह से जान गंवा रहे हैं।

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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