Fact Check
Search

यूरोप ने बढ़ाई भारत की चिंता! इथेनॉल वाले उत्पादों पर बैन लगाने की तैयारी, बताया कैंसर का खतरा

यूरोप ने बढ़ाई भारत की चिंता

यूरोप ने बढ़ाई भारत की चिंता! इथेनॉल वाले उत्पादों पर बैन लगाने की तैयारी, बताया कैंसर का खतरा

यूरोप ने बढ़ाई भारत की चिंता

नई दिल्ली: यूरोपीय संघ (EU) ने इथेनॉल आधारित उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार शुरू कर दिया है। यूरोपीय केमिकल एजेंसी (ECHA) की हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इथेनॉल का लंबे समय तक इस्तेमाल कैंसर और गर्भावस्था संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है। इस रिपोर्ट के बाद ईयू हैंड सैनिटाइजर, क्लीनिंग प्रोडक्ट्स और अन्य इथेनॉल मिश्रित वस्तुओं पर सख्ती की तैयारी में है।

भारत के लिए यह कदम चिंता का कारण बन गया है, क्योंकि इथेनॉल न केवल भारत की ऊर्जा नीति का अहम हिस्सा है बल्कि सौंदर्य प्रसाधन, इत्र और दवा उद्योग में भी इसका व्यापक उपयोग होता है।

ECHA की रिपोर्ट और यूरोपीय प्रस्ताव

10 अक्टूबर को ECHA की समिति ने इथेनॉल को “संभावित रूप से विषाक्त” पदार्थ के रूप में वर्गीकृत करने की सिफारिश की।रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक संपर्क या अत्यधिक उपयोग से कैंसर और प्रजनन संबंधी खतरे हो सकते हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईयू अब सैनिटाइजर और जैविक सफाई उत्पादों में इथेनॉल के उपयोग को सीमित करने पर विचार कर रहा है। इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नवंबर 2025 में होने वाली ईयू बैठक में लिया जाएगा।

भारतीय विशेषज्ञों की राय

भारतीय वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में इथेनॉल हानिकारक नहीं है।
कोविड-19 महामारी के बाद से हैंड सैनिटाइजर लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं और भारत की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति (20%) पेट्रोल आयात घटाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
ऐसे में यूरोपीय संघ का यह कदम भारत के औद्योगिक और आर्थिक हितों को प्रभावित कर सकता है।

क्या सच में बढ़ा है खतरा?

इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सोप्स, डिटर्जेंट एंड मेंटेनेंस प्रोडक्ट्स (AISE) ने कहा है कि ईयू का मूल्यांकन मुख्य रूप से अत्यधिक शराब सेवन पर आधारित है। इसका मतलब यह जोखिम उन लोगों के लिए है जो बड़ी मात्रा में इथेनॉल का सेवन करते हैं, न कि उन लोगों के लिए जो इसे बाहरी उपयोग (जैसे सैनिटाइजर या क्लीनर) के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

WHO क्या कहता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इथेनॉल को हाथों की सफाई के लिए सुरक्षित बताया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं और संवेदनशील व्यक्तियों को इसके लंबे समय तक संपर्क से बचना चाहिए।

भारत को कितना नुकसान हो सकता है

ईयू भारत का एक प्रमुख निर्यात बाजार है। अगर यूरोप में इथेनॉल आधारित उत्पादों पर रोक लगाई गई तो इत्र, लोशन, कॉस्मेटिक और पेट्रोल मिश्रण उद्योग को झटका लग सकता है। ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल जलने से एसिटाल्डिहाइड और फॉर्मेल्डिहाइड जैसी गैसें निकलती हैं, जिन्हें कैंसरजनक माना जाता है।

हालांकि, आशा हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च सेंटर के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. श्रीनाथ का कहना है —
“इथेनॉल अपने आप में खतरनाक नहीं है। इसका असर इस पर निर्भर करता है कि इसका उपयोग किस मात्रा और स्थिति में किया जा रहा है। कई बार यह अन्य जहरीले तत्वों को कम करने में भी मदद करता है।”

इथेनॉल का उपयोग कहाँ-कहाँ होता है

  • पेट्रोल में मिश्रण के रूप में
  • शराब और मादक पेय पदार्थों में
  • फार्मास्यूटिकल्स, पेंट, सौंदर्य प्रसाधन और खाद्य उत्पादों में
  • सफाई और कीटाणुनाशक एजेंट के रूप में

दलित युवक को बंधक बनाकर पेशाब पिलाया! सूरपुरा गांव में धारा 144 लागू, दोनों समाज ने ‘सामाजिक बहिष्कार’ का ऐलान!   

admin

Hi I am admin

Leave a Comment

Your email address will not be published.