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चीन और PoK को चुनौती देने वाला ‘आयनी एयरबेस’ भारत के हाथ से निकला! जानें क्यों किया गया यह बड़ा फैसला?

आयनी एयरबेस

चीन और PoK को चुनौती देने वाला ‘आयनी एयरबेस’ भारत के हाथ से निकला! जानें क्यों किया गया यह बड़ा फैसला?

नई दिल्ली: भारत ने एक बड़ा सामरिक फैसला लिया है। ताजिकिस्तान में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आयनी एयरबेस (Ayni Airbase) से भारत ने अपनी सैन्य मौजूदगी पूरी तरह समाप्त कर ली है। यह फैसला भारत और ताजिकिस्तान के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद लिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, यह वही एयरबेस है जहां भारत ने लगभग दो दशक पहले अफगानिस्तान में तालिबान विरोधी नॉर्दर्न अलायंस का समर्थन करते हुए पहली बार अपने सैनिक और वायुसेना कर्मियों को तैनात किया था।

समझौता खत्म, 2022 तक पूरी हुई वापसी

जानकारी के मुताबिक, भारत और ताजिकिस्तान के बीच एयरबेस के विकास और संयुक्त संचालन को लेकर हुआ समझौता लगभग चार साल पहले समाप्त हो गया था। इसके बाद भारतीय कर्मियों की वापसी चरणबद्ध तरीके से शुरू हुई, जो 2022 तक पूरी हो गई। अब यह एयरबेस पूरी तरह ताजिकिस्तान सरकार के नियंत्रण में है। राजधानी दुशांबे से करीब 10 किलोमीटर पश्चिम स्थित यह एयरबेस मध्य एशिया में भारत की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक मौजूदगी मानी जाती थी।

भारत ने किया था 100 मिलियन डॉलर का निवेश

आयनी एयरबेस मूल रूप से सोवियत काल का एक पुराना हवाई अड्डा था। भारत ने 2000 के दशक में इसे आधुनिक रूप दिया। सूत्रों के अनुसार, भारत ने इस एयरबेस के पुनर्निर्माण पर करीब 100 मिलियन डॉलर (लगभग ₹830 करोड़) खर्च किए।
इस दौरान रनवे को 3,200 मीटर तक लंबा और मजबूत किया गया ताकि कॉम्बैट जेट्स और भारी ट्रांसपोर्ट विमान वहां उतर सकें।
इसके अलावा, फ्यूल डिपो, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर, हैंगर और शेल्टर जैसी आधुनिक सुविधाएं भी बनाई गईं।

भारत का पहला विदेशी एयरबेस

आयनी एयरबेस को भारत का पहला विदेशी एयरबेस माना जाता है। यहां स्थायी फाइटर स्क्वाड्रन नहीं था, लेकिन भारत ने ताजिकिस्तान को दो से तीन Mi-17 हेलीकॉप्टर गिफ्ट किए थे, जिन्हें भारतीय वायुसेना के पायलट उड़ाते थे।
2014 के आसपास कुछ समय के लिए भारत ने अपने Su-30MKI लड़ाकू विमान भी यहां तैनात किए थे। करीब 200 भारतीय सैन्य कर्मी, जिनमें थलसेना और वायुसेना दोनों के अधिकारी शामिल थे, इस बेस पर तैनात रहते थे।

रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम

आयनी एयरबेस का महत्व भारत की भौगोलिक और सामरिक स्थिति से जुड़ा था।यह बेस अफगानिस्तान के वाखान कॉरिडोर के पास स्थित है, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से महज 20 किलोमीटर दूर है।
यदि PoK पाकिस्तान के कब्जे में न होता, तो ताजिकिस्तान भारत की सीमा के बहुत नजदीक होता।
इस बेस से भारतीय लड़ाकू विमान पेशावर और इस्लामाबाद जैसे शहरों तक पहुंच सकते थे।

नॉर्दर्न अलायंस को मदद और अफगान मिशन

2000 के दशक की शुरुआत में भारत की इस मौजूदगी का मुख्य उद्देश्य तालिबान-विरोधी नॉर्दर्न अलायंस को सहायता देना था। भारत ने न केवल खाद्य सामग्री और उपकरणों की सप्लाई तेज की, बल्कि हवाई निगरानी और लॉजिस्टिक मिशन भी संचालित किए।
इसी के तहत भारत ने ताजिकिस्तान के फरखोर में एक सैन्य अस्पताल बनाया था, जहां घायल नॉर्दर्न अलायंस लड़ाकों का इलाज होता था। इसी अस्पताल में 9/11 से दो दिन पहले अलायंस नेता अहमद शाह मसूद को घायल अवस्था में लाया गया था, जहां उनका निधन हुआ।

अफगानिस्तान संकट के दौरान भी हुआ इस्तेमाल

2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया था, तब भारत ने आयनी एयरबेस का इस्तेमाल अपने नागरिकों और राजनयिकों को सुरक्षित निकालने के लिए किया था।उस दौरान भारतीय वायुसेना और सेना ने मिलकर राहत अभियान चलाया था। बाद में सभी भारतीय कर्मियों और तकनीकी संसाधनों को वापस बुला लिया गया।

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