भोजपुरी स्टार और राजनेताओं ने छठ पर मचाई धूम !आखिर छठ बिहार इतना महत्व क्यों रखता है ?

बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित देश के कई राज्यों में छठ महापर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि व्रती महिलाएं पूरे 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखती हैं। यानी न तो जल ग्रहण करती हैं और न ही अन्न। इसके बावजूद वे पूरे समर्पण और आस्था के साथ सूर्य देव को दो बार अर्घ्य देती हैं — पहले डूबते सूर्य को और फिर अगले दिन उगते सूर्य को। इसी के साथ यह पावन व्रत पूर्ण होता है।
बिहार में छठ पूजा का विशेष महत्व
बिहार में छठ पूजा का बहुत विशेष स्थान है। यह सूर्य देव, छठी मैया और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने वाला प्राचीन पर्व है। छठ को बिहार की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है। धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से इसका गहरा महत्व है। इस पर्व को सभी वर्गों और समुदायों के लोग मिलकर मनाते हैं।
पौराणिक कथाओं में छठ का संबंध महाभारत काल की घटनाओं से भी बताया गया है। कहा जाता है कि कर्ण सूर्य देव के परम भक्त थे और उन्होंने ही सूर्य उपासना की परंपरा की शुरुआत की थी। वहीं द्रौपदी ने भी कठिन समय में सूर्य की उपासना कर अपने परिवार की रक्षा की थी। यह पर्व नदियों, जल और पर्यावरण के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है।
भोजपुरी स्टार और राजनेताओं ने लिया पूजा में हिस्सा
भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने अपने परिवार के साथ छठ पूजा धूमधाम से मनाई। घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देने पहुंचीं अक्षरा सिंह ने छठ गीत गाया और कहा कि उन्हें विश्वास था कि छठी मैया स्वयं उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगी।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी अपने परिवार के साथ छठ पूजा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि छठ महापर्व हर बिहारी के जीवन का अभिन्न हिस्सा है और यह त्योहार पूरे उत्साह और परिवारिक एकता का प्रतीक है।
जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने बिहार के अररिया में छठ पूजा अनुष्ठान में भाग लिया। उन्होंने अपने परिवार के साथ उगते सूर्य को अर्घ्य दिया और सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।
देश की राजधानी दिल्ली में भी छठ की भव्यता देखने को मिली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने परिवार के साथ यमुना घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। उन्होंने कहा कि छठी मैया का आशीर्वाद सभी भारतवासियों पर बना रहे और हर वर्ष यह पर्व और भव्यता के साथ मनाया जाए।
छठ पर्व की शुरुआत “नहाय-खाय” से
छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है। इस दिन व्रती स्नान कर सूर्य देव की पूजा करते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। नहाय-खाय के बाद दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य के साथ व्रत का समापन होता है। यह पर्व केवल पूजा नहीं बल्कि प्रकृति से जुड़ने का प्रतीक है। इसमें जल, अन्न और सूर्य — तीनों की पूजा की जाती है, जो जीवन के आधार हैं।
चार दिनों का पर्व, हर दिन का अपना अर्थ
पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है। इस दिन स्नान कर सूर्य देव की पूजा की जाती है और व्रती सात्विक भोजन करते हैं।
दूसरे दिन खरना होता है, जिसमें व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
तीसरे दिन संध्या अर्घ्य में अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है।
चौथे दिन उषा अर्घ्य और पारण होता है, जब व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करते हैं।
नहाय-खाय का आध्यात्मिक महत्व
नहाय-खाय छठ का पहला और सबसे पवित्र चरण है। यह दिन इस बात का संकेत है कि व्रती अब अपने सामान्य जीवन से हटकर पूरी तरह भक्ति और अनुशासन के मार्ग पर चलने के लिए तैयार हैं। इस दिन घर और रसोई को पूरी तरह साफ किया जाता है। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना और सूर्य देव की आराधना करना शुभ माना जाता है।
नहाय-खाय के दिन सादा सात्विक भोजन किया जाता है, जिससे मन की पवित्रता प्राप्त होती है। यह सादगी हमें यह सिखाती है कि सादे जीवन में भी गहराई और कृतज्ञता छिपी होती है। इस दिन सुबह पूजा से पहले जल या अन्न ग्रहण करना वर्जित होता है। यही दिन छठ की पवित्र यात्रा की शुरुआत माना जाता है, जो चार दिनों तक भक्ति, अनुशासन और आस्था का अद्भुत संगम लेकर आती है।
छठ पूजा का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
छठ पूजा में सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समय अर्घ्य देने की परंपरा वैज्ञानिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिकों के अनुसार, सुबह छह से आठ बजे और शाम चार से छह बजे तक सूर्य की किरणों में यूवी-बी रेज का संतुलित रूप होता है। यह किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाए बिना शरीर को विटामिन डी प्रदान करती हैं।
व्रती जब बिना किसी कृत्रिम पदार्थ या सनस्क्रीन के सूर्य की किरणों को ग्रहण करती हैं, तो शरीर प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स होता है और कोशिकाओं में कैल्शियम और फॉस्फोरस का संतुलन बनता है। इस प्रकार छठ पूजा न केवल धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी अत्यंत लाभकारी पर्व है।