पाकिस्तान में सैनेटरी पैड्स पर लगता है 40% टैक्स , भारत में सैनेटरी पैड्स पर कितना टैक्स लगाती है सरकार ?
महिलाओं के सैनेटरी पैड्स से जुड़ा मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है। यह महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ जुड़ा विषय है। ऐसे में जब इनसे जुड़े चीज़ों पर सरकारें भारी टैक्स लगाती हैं, तो यह बहस छिड़ना स्वाभाविक है। भारत और पाकिस्तान की तुलना करें तो इस समय दोनों देशों की स्थिति बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है। भारत ने सैनेटरी पैड्स को टैक्स से पूरी तरह मुक्त कर रखा है, जबकि पाकिस्तान में इन पर करीब 40% तक टैक्स वसूला जा रहा है।
क्या है पाकिस्तान में स्थिति
दूसरी ओर पाकिस्तान में स्थिति काफी अलग है। वहां सैनेटरी पैड्स पर करीब 40% तक टैक्स वसूला जा रहा है। इसमें स्थानीय स्तर पर बनाए गए पैड्स पर 18% सेल्स टैक्स और आयातित पैड्स या कच्चे माल पर 25% कस्टम ड्यूटी शामिल है। इस तरह कुल मिलाकर महिलाओं को हर 100 पाकिस्तानी रुपये के खर्च पर लगभग 40 रुपये टैक्स के रूप में चुकाने पड़ते हैं।
इस भारी टैक्स व्यवस्था के खिलाफ पाकिस्तान की महिला कार्यकर्ता और वकील हाल ही में अदालत का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। लाहौर हाई कोर्ट की रावलपिंडी बेंच में दायर याचिका में कहा गया है कि sanitary Pass को “लक्ज़री आइटम” मानना न केवल अव्यवहारिक है बल्कि महिलाओं के साथ भेदभाव भी है। याचिका में सरकार से मांग की गई है कि इन उत्पादों को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में रखा जाए और टैक्स पूरी तरह समाप्त किया जाए।
इस टैक्स का सबसे बड़ा असर गरीब और ग्रामीण महिलाओं पर पड़ता है। पाकिस्तान में केवल लगभग 12% महिलाएं ही बाजार में मिलने वाले सैनेटरी पैड्स का उपयोग कर पाती हैं। बाकी महिलाएं कपड़े या असुरक्षित विकल्पों का सहारा लेती हैं, जिससे संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
भारत में क्या है हालात
भारत में 1 जुलाई 2017 को जब GST लागू हुआ था, तब सैनेटरी पैड्स पर 12% टैक्स लगाया गया था। उस समय महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया था। उनका कहना था कि सैनेटरी पैड्स कोई विलासिता की वस्तु नहीं, बल्कि महिलाओं की जरूरत हैं। लगातार आंदोलनों और जनदबाव के बाद केंद्र सरकार ने 21 जुलाई 2018 को इन पर से GST पूरी तरह से हटा दिया।
अब भारत में सैनेटरी पैड्स 0% GST श्रेणी में आते हैं। इसका मतलब है कि कोई टैक्स नहीं लगता है । हालांकि राहत की यह तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। पैड्स के निर्माण में लगने वाली कच्ची सामग्री जैसे सुपर अब्जॉर्बेंट पॉलिमर, प्लास्टिक शीट, गोंद और पैकेजिंग मटेरियल पर अभी भी 12% से 18% तक GST लगता है। इसका सीधा असर निर्माण लागत पर पड़ता है, और इस वजह से बाज़ार में पैड्स की कीमतें बहुत ज्यादा नहीं घटीं।

ग्रामीण इलाकों में समस्या
भारत में टैक्स हटाने के बाद भी यह समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन वहां स्थिति काफी बेहतर है। सरकारी योजनाओं, एनजीओ और महिला समूहों की पहल से अब ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते सैनेटरी उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं। भारत ने महिलाओं की आवश्यकताओं को समझते हुए सैनेटरी पैड्स को टैक्स-मुक्त कर एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है।
पाकिस्तान में आज भी सैनेटरी पैड्स पर टैक्स को लेकर कोई ठोस नीति नहीं है, जिससे यह मुद्दा नीतिगत उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी देश की असली तरक्की तभी मानी जा सकती है जब वहां की महिलाएं बिना झिझक और आर्थिक परेशानी के अपने स्वास्थ्य की देखभाल कर सकें।