ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा को टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि मिली। उनसे पहले धोनी, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर को भी यह सम्मान मिल चुका है। जानिए क्यों देश अपने खिलाड़ियों को सेना में मानद रैंक देता है।
लेफ्टिनेंट कर्नल बने ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा, आखिर क्यों ओलंपिक और खेल जगत के खिलाड़ियों को सेना में दिया जाता है पद?
नीरज चोपड़ा का सेना में हुआ प्रमोशन सूबेदार मेजर से लेफ्टिनेंट कर्नल बने ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट
ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा को टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि मिली है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नीरज चोपड़ा को मानद पद का चिन्ह प्रदान किया। उनसे पहले महेंद्र सिंह धोनी और कपिल देव को भी यह सम्मान मिल चुका है, जबकि सचिन तेंदुलकर को भारतीय वायुसेना में ग्रुप कैप्टन की मानद उपाधि दी गई थी।
नीरज चोपड़ा को मिली लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि
22 अक्टूबर 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली में आयोजित पिपिंग समारोह के दौरान ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट भाला फेंक खिलाड़ी और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा को क्षेत्रीय सेना (टेरिटोरियल आर्मी) में लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद पद का प्रतीक चिन्ह औपचारिक रूप से प्रदान किया।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि “लेफ्टिनेंट कर्नल (मानद) नीरज चोपड़ा अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रीय गौरव के सर्वोच्च आदर्शों के प्रतीक हैं। वे खेल जगत और सशस्त्र बलों—दोनों के लिए आने वाली पीढ़ियों के प्रेरणास्रोत हैं।”
समारोह में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। नीरज चोपड़ा इस दौरान सेना की वर्दी में नजर आए और उन्हें आधिकारिक तौर पर उनके नए रैंक की पट्टियां लगाई गईं।
धोनी और कपिल देव को भी मिला मानद सैन्य रैंक
महेंद्र सिंह धोनी और कपिल देव को भी भारतीय क्षेत्रीय सेना (टेरिटोरियल आर्मी) में लेफ्टिनेंट कर्नल (मानद) की उपाधि दी गई थी। यह कोई नियमित सैन्य नियुक्ति नहीं होती, बल्कि यह सम्मान देश के प्रति योगदान और युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से दिया जाता है।
महेंद्र सिंह धोनी को यह मानद रैंक 1 नवंबर 2011 को मिली थी।
उन्हें यह सम्मान भारत को 2007 टी-20 विश्व कप और 2011 एकदिवसीय विश्व कप जिताने में उनके नेतृत्व और योगदान के लिए प्रदान किया गया था। कपिल देव को यह मानद रैंक 24 सितंबर 2008 को दी गई थी। यह सम्मान भारत को 1983 में पहला क्रिकेट विश्व कप जिताने और उनके अनुशासन व देशभक्ति के लिए दिया गया था।
सचिन तेंदुलकर को मिला वायुसेना का सम्मान
सचिन तेंदुलकर को 2010 में भारतीय वायुसेना में ग्रुप कैप्टन की मानद उपाधि दी गई थी।
यह सम्मान युवाओं को वायुसेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने और वायुसेना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दिया गया था।
नीरज चोपड़ा का शुरुआती जीवन
नीरज चोपड़ा का जन्म 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के पानीपत जिले के खंडरा गांव में हुआ था। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले नीरज ने कम उम्र में ही भाला फेंक खेल में रुचि दिखाई।
सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत रहते हुए उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन किया।
2020 टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। वह भारत के पहले ट्रैक एंड फील्ड ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बने।
नीरज चोपड़ा की प्रमुख उपलब्धियां
नीरज चोपड़ा को उनकी असाधारण उपलब्धियों और राष्ट्र के प्रति सेवा को मान्यता देते हुए 16 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा टेरिटोरियल आर्मी में मानद कमीशन प्रदान किया गया।
उन्हें अब तक कई राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं —
- पद्मश्री (2022)
- मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार (2021)
- अर्जुन पुरस्कार (2018)
अन्य प्रमुख उपलब्धियां:
- 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक
- 2018 और 2022 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक
- 2022 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक
- 2023 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक (पहले भारतीय के रूप में)
- 2024 पेरिस ओलंपिक में रजत पद
क्या होता है ‘मानद पद’?
मानद पद (Honorary Rank) एक ऐसा सम्मान होता है जो किसी व्यक्ति को उसकी असाधारण उपलब्धियों, नेतृत्व, अथक प्रयासों और समाज या राष्ट्र के प्रति योगदान के लिए दिया जाता है।
इसके लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता या सैन्य प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती।
यह पद विज्ञान, साहित्य, कला, समाजसेवा, संस्कृति, खेल या नेतृत्व जैसे विभिन्न क्षेत्रों में व्यक्तियों के योगदान को सम्मानित करने के लिए प्रदान किया जाता है।
भारत में खिलाड़ियों को मानद सैन्य पद देना सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करने का प्रतीक है।
नीरज चोपड़ा, धोनी, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं — जो यह साबित करते हैं कि मैदान पर जीती गई जीत, देश के सम्मान में बदल सकती है।