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घोड़े की मौत पर रखी मालिक ने रखवाई अरदास, छपवाए कार्ड! आखिर पंजाब का ये शख्स क्यों मानता था घोड़े को अपना तीसरा बेटा?

घोड़े की मौत पर रखी मालिक ने रखवाई अरदास, छपवाए कार्ड! आखिर पंजाब का ये शख्स क्यों मानता था घोड़े को अपना तीसरा बेटा?

पंजाब के लुधियाना से इंसान और जानवर के रिश्ते की एक दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है। खासी कलां गांव के रहने वाले चरणजीत सिंह मिंटा अपने घोड़े ‘फतेहजंग’ को सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि अपना तीसरा बेटा मानते थे।

जब फतेहजंग की अचानक मौत हुई, तो चरणजीत इतने दुखी हो गए कि उन्होंने उसकी आत्मा की शांति के लिए भोग समागम रखा। इसके लिए निमंत्रण कार्ड छपवाए गए और गुरुद्वारे में अरदास का आयोजन भी किया गया, जिसमें दोस्तों और रिश्तेदारों को आमंत्रित किया गया।

तीसरी पीढ़ी तक पहुंची परंपरा

चरणजीत का कहना है कि घोड़े पालना उनके परिवार की एक पुरानी परंपरा है। उनके दादा और पिता भी घोड़े पालते थे, और यह लगाव अब तीसरी पीढ़ी तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि फतेहजंग उनके घर में ही पैदा हुआ था और बचपन से ही बहुत प्यार करने वाला था।

उसका रंग हल्का नीला था, जो देखने में बेहद आकर्षक लगता था। धीरे-धीरे फतेहजंग परिवार का हिस्सा बन गया। चरणजीत और उनकी पत्नी के दोनों बेटे विदेश में रहते हैं— अपना ज्यादातर समय इसी घोड़े के साथ बिताते थे।

घोड़े को बताते थे अपना तीसरा बेटा

चरणजीत सिंह कहते हैं कि जब भी कोई उनसे पूछता था कि उनके कितने बेटे हैं, तो वे जवाब देते थे –

“तीन बेटे हैं — बड़ा गुरइकबाल ऑस्ट्रेलिया में है, दूसरा मनलोचन अमेरिका में, और तीसरा बेटा फतेहजंग इंडिया में।”

यह सुनकर लोग हैरान हो जाते थे, लेकिन चरणजीत के लिए यह कोई मज़ाक नहीं था — फतेहजंग सच में उनका बेटा था।

घोड़े की मौत

अचानक बिगड़ी तबीयत, नहीं बच पाया फतेहजंग

फतेहजंग करीब साढ़े तीन साल का था और बिल्कुल स्वस्थ था। लेकिन 8 अक्टूबर को अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। डॉक्टरों ने इलाज किया, पर कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई।

जांच में पता चला कि उसके अंदरूनी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। फतेहजंग की मौत के बाद चरणजीत सिंह बेहद टूट गए। उन्होंने कहा,

“वो मेरे लिए सिर्फ एक घोड़ा नहीं था, मेरे बेटे जैसा था। उसके जाने के बाद घर सूना लगने लगा है।”

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Shashwat Srijan

Content Writer

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