गुजरात में सियासी हलचल तेज़ – इस्तीफों के बाद शुक्रवार को होगा भूपेंद्र पटेल मंत्रिमंडल का विस्तार
गुजरात में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली सरकार में जल्द ही कैबिनेट विस्तार होगा। इसके पहले ही राज्य के सभी मंत्रियों ने अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब सबकी नज़र कल की सुबह की बैठक पर अटकी हुई हैं।
क्या होने वाला है बड़ा बदलाव?
सूत्रों के मुताबिक, इस बार के विस्तार में करीब 8 नए चेहरों को मौका मिल सकता है। वहीं, कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी तय मानी जा रही है। गुजरात के 182 सदस्यीय विधानसभा में अधिकतम 27 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जबकि अभी कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत 17 मंत्री हैं। जिनमें आठ कैबिनेट मंत्री और बाकी राज्य मंत्री शामिल हैं। भूपेंद्र पटेल ने 12 दिसंबर 2022 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अब तीन साल बाद पहली बार उनके मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जा रहा है।
इस्तीफों की वजह क्या है?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह कदम किसी गुजरात फॉर्मूले का हिस्सा कहा जा रहा है। भाजपा का यह पुराना तरीका रहा है कि चुनाव से कुछ समय पहले पूरी टीम बदलकर एंटी इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर को कम किया जाए।
2021 में भी हुआ था बदलावों
सितंबर 2021 में भी अचानक पूरे मंत्रिमंडल को हटा दिया गया था। उस वक्त मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इस्तीफा दिया था और भूपेंद्र पटेल को नया CM बनाया गया था। उस समय भी भाजपा ने यह रणनीति अपनाई थी कि चेहरे बदलो, छवि सुधारो और इसका फायदा भी मिला।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने रिकॉर्ड 156 सीटें जीतकर इतिहास बना दिया था । इस बार भी ऐसा ही कदम चुनाव से लगभग दो साल पहले उठाया गया है।
भाजपा की रणनीति- 4 बड़ी वजहें
इस मंत्रिमंडल विस्तार के पीछे चार प्रमुख कारण हैं —
1. तीन साल से कोई बदलाव नहीं हुआ था
2022 में जब भूपेंद्र पटेल दोबारा मुख्यमंत्री बने, तब से मंत्रिमंडल में कोई बदलाव नहीं किया गया था। अब तीन साल बाद पार्टी को लगता है कि नई ऊर्जा और नए चेहरों की ज़रूरत है।
2. कुछ मंत्रियों के काम से असंतोष
भाजपा के अंदर यह भी चर्चा है कि कुछ मंत्री कमान संभालने की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। हाल ही में हुए विसावदर उपचुनाव में भाजपा के कई बड़े नेता चुनाव प्रचार में जुटे थे, फिर भी पार्टी सीट हार गई। इससे पार्टी ने तय किया कि संगठन और सरकार में नए चेहरों को लाया जाए।
3. पुराने दिग्गजों की वापसी की तैयारी
विसावदर सीट पर AAP की जीत ने भाजपा को थोड़ा सतर्क कर दिया है। अब पार्टी नहीं चाहती कि 2027 के चुनाव में कोई जोखिम लिया जाए। इसलिए कुछ अनुभवी नेताओं, जिन्हें लंबे समय से किनारे कर दिया गया था, उन्हें फिर से बड़े पद मिलने की उम्मीद है।
4. सत्ता विरोधी लहर से बचाव की कोशिश
गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते समय से ही भाजपा का एक पैटर्न रहा है लोगों की नाराजगी को भांपते ही चेहरे बदल दो। आनंदीबेन पटेल, विजय रूपाणी और अब भूपेंद्र पटेल की सरकार में भी यही तरीका अपनाया गया है। इससे जनता को यह संदेश मिलता है कि पार्टी खुद को सुधारने के लिए तैयार है।
5. राज्य में भाजपा की मजबूत पकड़
गुजरात भाजपा का गढ़ माना जाता है। मोदी-शाह की जोड़ी की वजह से यहां पार्टी की पकड़ बेहद मजबूत है। 2022 के चुनाव में भाजपा ने जो 156 सीटों की ऐतिहासिक जीत हासिल की थी, वह इसी रणनीति का नतीजा थी। उस समय पार्टी ने 103 नए उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जबकि 38 विधायकों और 5 मंत्रियों के टिकट काटे गए थे। इस बार भी उसी फॉर्मूले को दोहराने की तैयारी है। ताकि जनता को लगे कि सरकार लगातार नए चेहरों और नए कामों के साथ आगे बढ़ रही है।
विसावदर उपचुनाव से बदली हवा
हाल ही में हुए विसावदर उपचुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल इटालिया ने भाजपा को हराया। यह नतीजा पार्टी के लिए एक चेतावनी की तरह आया। इसके बाद ही भाजपा ने संगठन और सरकार में बदलाव की तैयारी तेज कर दी।
तैयारी 2027 की
यह बदलाव केवल आज की राजनीति नहीं बल्कि भविष्य की तैयारी है। अगले दो साल में विधानसभा चुनाव हैं और जनवरी में नगर पंचायत चुनाव भी होने वाले हैं। ऐसे में भाजपा चाहती है कि नई टीम, नया जोश लेकर मैदान में उतरा जाए।
भूपेंद्र पटेल को लेकर पार्टी नेतृत्व पूरी तरह भरोसे में है, इसलिए CM पद में बदलाव नहीं किया गया , लेकिन उनकी टीम को नया रूप दिया जा रहा है।