2020 के विधानसभा चुनाव में जीतने वाले 66% विधायक यानी 241 में से 158 विधायकों ने अपने हलफनामों में आपराधिक मामले घोषित
जानें कौन विधायक सबसे अमीर कौन विधायक गरीब ?
बिहार चुनाव नजदीक है । लेकिन बिहार की सियासत में एक बार फिर वही पुरानी कहानी दोहराई जा रही है। सत्ता, अपराध और पूंजी का गठजोड़। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच की ताज़ा रिपोर्ट ने इस हकीकत को साफ़ कर दिया है कि राज्य की राजनीति में अब साफ-सुथरी छवि वाले चेहरों की जगह दागदार चेहरे ज़्यादा ताकतवर बन बैठे हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े
साल 2020 के विधानसभा चुनाव में जीतने वाले 66% विधायक यानी 241 में से 158 विधायकों ने अपने हलफनामों में आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इनमें से 119 विधायकों (करीब 49%) पर गंभीर आपराधिक आरोप दर्ज हैं। जैसे हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, दंगा, और भ्रष्टाचार से जुड़े केस।
कितने विधायक कितने गुनाह?
एडीआर और बिहार इलेक्शन वॉच के संयोजक राजीव कुमार ने बताया कि रिपोर्ट 241 विधायकों के हलफनामों के विश्लेषण पर आधारित है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 16 विधायकों पर हत्या से संबंधित प्रकरण दर्ज हैं। यानी विधानसभा में बैठे हर 15 में से एक विधायक पर हत्या जैसा गंभीर आरोप है!

दलवार विश्लेषण
सूत्रों के अनुसार आंकड़े बताते हैं कि अपराध का रंग किसी एक पार्टी पर नहीं चढ़ा है। बल्कि हर दल के चेहरे किसी न किसी आरोप से रंगे हुए हैं। आइए जानते हैं आंकड़े –
• भाजपा (BJP) – 83 विधायकों में से 41 (49%) पर गंभीर आपराधिक मामले
• राजद (RJD)- 72 में से 43 (60%) विधायक गंभीर अपराधों में आरोपी
• जदयू (JDU)। – 47 में से 13 (28%) पर गंभीर केस
• कांग्रेस – 17 में से 9 (53%)
• भाकपा (माले) – 11 में से 7 (64%)
• हम (HUM) – 4 में से 1 (25%)
• माकपा (CPI-M) – 2 में से 2 (100%)
• एआईएमआईएम – 1 में से 1 (100%)
• निर्दलीय उम्मीदवार – 2 में से 2 (100%)
ये साफ हैं कि कोई भी पार्टी पूरी तरह निर्दोष नहीं। सत्ता की राह अब साफ-सुथरी छवि से नहीं, बल्कि सियासी ताकत और प्रभाव से तय होती दिख रही है।
अपराध के साथ-साथ पूंजी की ताकत भी बिहार की राजनीति में गहराई तक जड़ जमा चुकी है। सूत्रों के अनुसार, बिहार विधानसभा के 241 विधायकों में से 194 करोड़पति हैं।इन सभी विधायकों की कुल घोषित संपत्ति 1121.61 करोड़ रुपये है। यानि औसतन हर विधायक के पास 4.6 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति है।
1. राजनीति दलों के आंकड़े –
• भाजपा के 72 विधायक करोड़पति हैं,
• राजद के 63 विधायक करोड़पति हैं।
2. सबसे अमीर और सबसे गरीब विधायक
एडीआर की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि किसके पास सबसे ज़्यादा दौलत है और कौन सादगी में राजनीति कर रहा है।
सबसे अमीर विधायक –
• नीलम देवी (मोकामा) – ₹80 करोड़
• मनोरमा देवी (बेलागंज) – ₹72 करोड़
• अजीत शर्मा (भागलपुर) – ₹43 करोड़
• सबसे कम संपत्ति वाले विधायक:
• राम विकास सदा (अलौली) – ₹70,000
• गोपाल रविदास (फुलवारीशरीफ) – ₹1 लाख+
• संदीप सौरभ (पालीगंज) – ₹3.45 लाख
इस से ये अंतर पता चलता हैं कि बिहार की राजनीति में अमीरी और गरीबी का फासला कितना बड़ा है। कोई विधायक 80 करोड़ रुपये का मालिक है, तो कोई अपनी जेब में महज़ कुछ हज़ार रुपये रखता है।
राजनीति की सूरत और सीरत पर उठा सवाल –
रिपोर्ट आने के बाद एक बार फिर यह बहस तेज़ हो गई है कि आखिर पार्टियाँ ऐसे उम्मीदवारों को टिकट क्यों देती हैं जिन पर गंभीर अपराध के आरोप हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार की राजनीति में अपराधियों का असर नया नहीं, लेकिन अब यह सामान्य बन चुका है। वोट बैंक, जातीय समीकरण और पैसा यही तीन फैक्टर अब उम्मीदवार की योग्यता तय करते हैं।
एडीआर का राजनीति दलों से आग्रह –
एडीआर ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया है कि वे आगामी चुनावों में उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि की गंभीर समीक्षा करें। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर दल अपने आंतरिक मापदंडों में ईमानदारी और नैतिकता को प्राथमिकता दें, तो राज्य की राजनीति की तस्वीर बदली जा सकती है, पर बड़ा सवाल यही है। क्या दल वाक़ई ऐसा करेंगे?