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आखिर क्यों GOLDEN TEMPE में क्यों घुसी थी सेना? चिदंबरम ने बताया ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ को एक बड़ी गलती

क्या है ऑपरेशन ब्लू स्टार की पूरी कहानी ,भिंडरावाले की एंट्री से इंदिरा गांधी की हत्या तक!

GOLDEN TEMPE

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के ऑपरेशन ब्लू स्टार पर दिए गए बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने इसे एक बड़ी गलती करार देते हुए कहा कि इस सैन्य कार्रवाई की भारी कीमत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। चिदंबरम ने यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्णय के लिए केवल इंदिरा गांधी को दोष देना उचित नहीं है, क्योंकि यह एक सामूहिक निर्णय था जिसमें सेना, पुलिस, खुफिया विभाग और सिविल सेवा के लोग भी शामिल थे।

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पी.चिदंबरम ने क्या कहा ?

चिदंबरम ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश के कसौली में आयोजित खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव में कहा, “ऑपरेशन ब्लू स्टार एक बड़ी गलती थी।” उन्होंने यह भी बताया कि इस निर्णय के पीछे कई कारक और विचार-विमर्श शामिल थे। उनका कहना था कि केवल इंदिरा गांधी को दोष देना उचित नहीं है, क्योंकि यह एक सामूहिक निर्णय था।

चिदंबरम ने पंजाब की वर्तमान स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “खालिस्तान की मांग लगभग समाप्त हो चुकी है और अब पंजाब की असली समस्या आर्थिक स्थिति है। उनका कहना था कि पंजाब में बेरोजगारी और विकास की कमी जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।”

SGPC का क्या है बयान

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने चिदंबरम के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। SGPC ने कहा कि चिदंबरम ने सही कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार गलत था, लेकिन यह भी कहा कि यह निर्णय केवल इंदिरा गांधी का नहीं था। SGPC ने इस बयान को गलत बताते हुए कहा कि यह निर्णय एक सामूहिक निर्णय था जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारियों की सहमति शामिल थी। लेकिन मंशा इंदिरा गांधी की थी । फिर राजीव गांधी ने भी दंगों को जस्टीफाई किया था ।

क्यों हुआ था ऑपरेशन ब्लू स्टार

जरनैल सिंह भिंडरावाले सिखों के कट्टर धार्मिक संगठन दमदमी टकसाल के प्रमुख थे। 13 अप्रैल 1978 को बैसाखी के दिन, निरंकारी समुदाय के जुलूस के विरोध में भिंडरावाले ने दरबार साहिब के पास सिखों की परंपरागत सभा बुलाई। इसके बाद अखंड कीर्तन जत्था और दमदमी टकसाल के लोग जुलूस लेकर निरंकारी समुदाय की तरफ बढ़े। इस झड़प में 13 सिख और 2 निरंकारी मारे गए।

24 अप्रैल 1980 को निरंकारी पंथ के प्रमुख गुरबचन सिंह की दिल्ली में उनके घर पर हत्या कर दी गई। इसके अगले ही साल, लाला जगत नारायण, पंजाब केसरी के संस्थापक और संपादक की हत्या हुई। इन हत्याओं का आरोप भिंडरावाले और उनके नए राजनीतिक संगठन दल खालसा पर लगाया गया।

1982 में भिंडरावाले ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास स्थित गुरु नानक निवास को अपना ठिकाना बना लिया। मंदिर के ठीक सामने स्थित अकाल तख्त से उन्होंने सिख समुदाय के लिए कट्टर उपदेश और आदेश जारी करना शुरू कर दिया।

केंद्र सरकार ने 1982 से 1984 तक कई बार भिंडरावाले को गिरफ्तार करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। अप्रैल 1983 में DIG एएस अटवाल की स्वर्ण मंदिर परिसर में हत्या के बाद स्थिति और बिगड़ी। अक्टूबर 1983 में पंजाब की विधानसभा भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।

दिसंबर 1983 में भिंडरावाले अकाल तख्त में घुस गया। 27 मई 1984 को शिरोमणि अकाली दल के नेता भी उन्हें समझाने पहुंचे, लेकिन उनकी सभी कोशिशें नाकाम रही। ऐसे में सेना के माध्यम से ही स्थिति को नियंत्रित करने का निर्णय लिया गया।

ऑपरेशन ब्लू स्टार जून 1984 में भारतीय सेना द्वारा अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में उग्रवादियों को बाहर निकालने के लिए चलाया गया था। इस सैन्य कार्रवाई के बाद, इंदिरा गांधी की उनके ही सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी, जिससे देशभर में तनाव फैल गया ।

 

 

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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