Search

पहले सूखा, अब बाढ़ की तबाही: मराठवाड़ा में 781 किसानों की आत्महत्या! आत्महत्या के आंकड़े बढ़े — आखिर कब तक यूं ही जान देंगे किसान?

कभी सूखे से जूझा, अब बाढ़ से तबाह

महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र दोहरी त्रासदी झेल रहा है।

2025 की बाढ़ में हजारों किसानों की फसलें डूबीं, सैकड़ों ने आत्महत्या की।

सरकार के पैकेज और वादों के बीच किसान अब भी निराशा और कर्ज में डूबे हैं।

 

मराठवाड़ा : कभी सूखे की मार, अब बाढ़ की तबाही — मराठवाड़ा का किसान दोहरी त्रासदी झेल रहा है। खेतों में पानी, घरों में गाद और चेहरों पर निराशा महाराष्ट्र का यह इलाका फिर एक बार संकट में है। सरकार के राहत पैकेज और वादों के बीच किसान आज भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सैकड़ों किसानों की फसलें डूब गईं, मवेशी बह गए और कई किसानों ने हताशा में अपनी जान दे दी है।

फसलों की तबाही — टूट गई उम्मीदें

मराठवाड़ा के कई गांवों में गन्ना, प्याज और धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं है। खेतों में गाद भर जाने से आने वाले वर्षों तक खेती मुश्किल हो जाएगी।
मातरेवाड़ी गांव के किसान लक्ष्मण पवार ने 80 हजार रुपये का कर्ज लिया था। बाढ़ में फसल डूबने के बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली। यह कहानी अकेले लक्ष्मण की नहीं, बल्कि हजारों किसानों की है। कई किसानों के कृषि उपकरण, भंडार और बीज तक पानी में बह गए। अब उनके पास खेती दोबारा शुरू करने के लिए न पैसा बचा है, न हौसला।

कितना हुआ नुकसान?

• अगस्त–सितंबर 2025 की बाढ़ से 29 जिले प्रभावित हुए।
• 68.69 लाख हेक्टेयर जमीन पर फसलों को नुकसान पहुंचा।
• 60,000 हेक्टेयर फसलें पूरी तरह तबाह हो गईं।
• जनवरी से सितंबर 2025 के बीच 781 किसानों ने आत्महत्या की।
• केवल मराठवाड़ा में 543 किसानों ने जान दी, जिनमें से बीड जिला (136 आत्महत्याएं) सबसे आगे रहा।

सरकारी पैकेज पर उठे सवाल

सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए 1500 करोड़ रुपये का आपात फंड और रबी सीजन में सहायता के लिए 6,175 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मुताबिक —“सूखी जमीन वाले किसानों को 35,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और सिंचित भूमि वाले किसानों को 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक मदद दी जाएगी।”
लेकिन किसान संगठनों ने इसे “कागज़ी राहत” बताया है। उनका आरोप है कि इस पैकेज में बीमा राशि को भी जोड़ लिया गया है, जिससे किसानों के हाथ में असली राहत 6,500 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं पहुंचेगी।

किसान संगठनों का गुस्सा

किसान नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के मौजूदा नियम किसानों के हित में नहीं हैं।

मराठवाड़ा की पुरानी पीड़ा

मराठवाड़ा के आठ जिलों छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, धाराशिव, लातूर, परभणी, नांदेड़ और हिंगोली के किसान दशकों से सूखे और बाढ़ की दोहरी मार झेल रहे हैं।कभी बारिश न होने से फसलें सूख जाती हैं, तो कभी अचानक आई बाढ़ सब कुछ बहा ले जाती है।2023 में सूखे से जूझ रहे इन जिलों के लिए 59,000 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित हुआ था, लेकिन किसानों के अनुसार उसका लाभ ज़मीनी स्तर तक नहीं पहुंचा। अब 2025 की बाढ़ ने वही कहानी दोहरा दी है।

क्या कहते है नेता

संजय राउत (शिवसेना UBT) ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा “अगर बाढ़ प्रभावित किसानों को मदद नहीं मिली तो यह साफ होना चाहिए कि पीएम केयर्स फंड आखिर किसके लिए है। सरकार विदेशी मेहमानों के स्वागत में व्यस्त है, जबकि किसान मर रहे हैं।”विजय वडेट्टीवार (कांग्रेस) ने कहा “जनवरी से सितंबर तक 781 किसानों ने आत्महत्या की, फिर भी सरकार राहत राशि का मज़ाक बना रही है। एनडीआरएफ की मदद से किसानों की बर्बादी नहीं रुकेगी।”वहीं, सरकार का कहना है कि दीपावली से पहले किसानों को लगभग 18,000 करोड़ रुपये का फसल मुआवजा दिया जाएगा, जिससे वे रबी सीजन की बुवाई कर सकें।

किसानों की मांग — ‘हम आंकड़े नहीं, इंसान हैं’

मराठवाड़ा के गांवों में आज एक ही सवाल गूंज रहा है “कब तक यूं ही जान देते रहेंगे किसान?”
कर्ज, फसल की बर्बादी और सरकारी लापरवाही ने हजारों परिवारों को अंधेरे में धकेल दिया है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि तुरंत राहत नहीं दी गई, तो आत्महत्या के आंकड़े और बढ़ेंगे।कभी महाराष्ट्र का ‘अन्न भंडार’ कहे जाने वाला मराठवाड़ा आज निराशा और दर्द का प्रतीक बन चुका है।

 

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

Leave a Comment

Your email address will not be published.