आजकल REEL SCROLL और शॉर्ट वीडियो युवाओं और वयस्कों में लोकप्रिय
लगातार देखने से दिमाग पर डोपामिन ओवरडोज़ और फोकस, याददाश्त और नींद पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ संतुलन बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।
डोपामिन की ओवरडोज़ और लत
चीन की तियानजिन नॉर्मल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कियांग वांग की टीम के अनुसार, शॉर्ट वीडियो लगातार देखने से दिमाग के रिवार्ड सिस्टम पर असर पड़ता है। जब हम हर रील स्वाइप करते हैं, तो दिमाग में फील-गुड केमिकल डोपामिन रिलीज होता है। प्लेटफॉर्म्स इसे छोटे, तेज़ और सरप्राइज से भरे वीडियो के रूप में पेश करते हैं ताकि उपयोगकर्ता बार-बार इसका आनंद लें।
धीरे-धीरे रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे किताब पढ़ना, बातचीत या खाना कम रोचक लगने लगती हैं। यह वही लत है जो शराब या जुए में देखी जाती है।

ध्यान और फोकस पर असर
रील्स की तेज़ कटिंग और लगातार नया कंटेंट देखने से प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स दिमाग का वह हिस्सा जो निर्णय, फोकस और भावनाओं को नियंत्रित करता है, थक जाता है।
•किसी एक काम पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है।
• छोटी जानकारी भूलने की समस्या बढ़ती है।
•लंबे समय तक गहराई से काम करना असहज लगता है।
• नींद और बॉडी क्लॉक पर प्रभाव
देर रात तक रील्स देखने से सर्केडियन क्लॉक प्रभावित होता है। मोबाइल की स्क्रीन और विजुअल्स दिमाग को अलर्ट मोड में डाल देते हैं, जिससे मेलाटोनिन का उत्पादन देर से होता है। इसका असर नींद की गुणवत्ता और याददाश्त पर भी पड़ता है।
कैसे बचें नुकसान से
विशेषज्ञों का सुझाव है कि शॉर्ट वीडियो मनोरंजन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इन्हें नियंत्रित करना आवश्यक है:
• स्क्रीन टाइम की लिमिट सेट करें।
•सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाएं।
• बीच-बीच में ब्रेक लें और दिमाग को आराम दें।
• किताब पढ़ना, वॉक पर जाना जैसी सुकून देने वाली गतिविधियां अपनाएं।
रील्स और शॉर्ट वीडियो मनोरंजन के लिए अच्छी चीज़ हैं, लेकिन हद से ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग की सेहत, नींद और फोकस प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए डिजिटल लाइफ में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।