एक महीने से भी कम समय तक प्रधानमंत्री रहे लेकोर्नु ने कैबिनेट गठन के बाद इस्तीफा देकर देश में अस्थिर राजनीतिक माहौल बढ़ाया; राष्ट्रपति मैक्रों पर दबाव बढ़ा

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नु ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे का कारण उनके मंत्रिमंडल की घोषणा के बाद हो रही आलोचना मानी जा रही है। उन्होंने तीन हफ्ते बाद कैबिनेट का गठन किया था, जिसमें 18 में से 12 मंत्री पिछली सरकार के ही थे। इसमें रक्षा मंत्री ब्रूनो ले मायेर और नए वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर की नियुक्ति पर भी विरोध हुआ था
।उनका कार्यकाल एक महीने से भी कम समय का रहा, जिससे वे 1958 के बाद फ्रांस के सबसे कम समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए।
लेकॉर्नु को 9 सितंबर को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था
लेकॉर्नु ने संसद में बजट पास कराने के लिए अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल न करने का ऐलान किया था और वामपंथी व दक्षिणपंथी सांसदों के साथ समझौते की कोशिश की। इसके बावजूद आलोचना बढ़ती गई और कैबिनेट गठन के सिर्फ कुछ ही घंटों बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। नए इकोलॉजी मंत्री एग्नेस पैनियर-रनेशर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे इस स्थिति से परेशान हैं।
गहराया राजनीतिक संकट
उनके इस्तीफे के साथ ही फ्रांस में राजनीतिक संकट और गहरा गया है। राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों अब तक चार असफल अल्पमत सरकारों का नेतृत्व कर चुके हैं। फ्रांस की नेशनल असेंबली में वामपंथी और दक्षिणपंथी सांसदों के पास 320 से ज्यादा सीटें हैं, जबकि मैक्रों के समर्थक 210 सीटों पर हैं। माना जा रहा था कि विरोधी दल अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे थे।
फ्रांस का राजनीतिक माहौल पिछले साल से अस्थिर बना हुआ है। लगातार चार प्रधानमंत्रियों के इस्तीफे और बढ़ता बजट घाटा देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ा रहे हैं। 2024 में फ्रांस का घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 5.8 प्रतिशत और कर्ज 113 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो यूरोपीय संघ के नियमों से कहीं अधिक है।
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