इजरायल में ग्रेटा थनबर्ग के साथ बदसलूकी बाल पकड़कर घसीटा गया ! इजरायली झंडा चूमने को मजबूर किया?”

पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग फिर से सुर्खियों में है। इजरायल से डिपोर्ट किए गए अंतरराष्ट्रीय एक्टिविस्ट्स ने दावा किया है कि ग्रेटा थनबर्ग के साथ इजरायली सुरक्षा बलों ने बेहद अमानवीय व्यवहार किया। आरोप है कि उन्हें बाल पकड़कर घसीटा गया और जबरन इजरायली झंडे को चूमने के लिए मजबूर किया गया।
फ्लोटिला से हिरासत में ली गईं ग्रेटा थनबर्ग
गाज़ा के लिए राहत सामग्री लेकर जा रहे “फ़्लोटिला मिशन” से इजरायली नौसेना ने शनिवार को करीब 137 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। इसी दौरान ग्रेटा थनबर्ग भी उन लोगों में शामिल थीं, जो गाज़ा के लोगों के लिए मानवीय सहायता लेकर जा रही थीं।
सहकर्मी एक्टिविस्ट्स के गंभीर आरोप
मलेशिया की एक्टिविस्ट हाजवानी हेलमी और विंडफील्ड बेवर ने मीडिया को बताया कि उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि ग्रेटा के साथ धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार हुआ। उनके अनुसार, “ग्रेटा को जबरन इजरायली झंडे में लपेटा गया और उसे चूमने को कहा गया। जब उसने इनकार किया, तो सैनिकों ने उसे धक्का दिया।”
इसी तरह, तुर्की के एक्टिविस्ट एरसिन सीलिक ने भी दावा किया कि ग्रेटा के बाल पकड़कर घसीटा गया और उसके साथ गाली-गलौज की गई। उन्होंने कहा, “हमारे सामने ही उसे अपमानित किया गया, जैसे कोई कैदी हो।”
इजरायल सरकार ने आरोपों को बताया झूठा
वहीं, इजरायल के विदेश मंत्रालय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि “हिरासत में लिए गए सभी लोगों के साथ अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार व्यवहार किया गया। उनके खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा या दुर्व्यवहार नहीं हुआ है।”
अल जजीरा की रिपोर्ट में क्या कहा गया
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 47 जहाजों में से इजरायली नौसेना ने सिर्फ 6 जहाजों को रोका। इन जहाजों पर सवार करीब 150 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था, जो 37 देशों से आए थे।
कौन हैं ग्रेटा थनबर्ग?
ग्रेटा थनबर्ग स्वीडन की प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। 3 जनवरी 2003 को स्टॉकहोम में जन्मीं ग्रेटा ने 2018 में सिर्फ 15 साल की उम्र में “Fridays for Future” आंदोलन शुरू किया था।
उनका अभियान जलवायु परिवर्तन के खिलाफ युवाओं की वैश्विक आवाज़ बन गया।
गाज़ा में जारी मानवीय संकट
अक्टूबर 2023 से इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष ने गाज़ा को तबाही की कगार पर पहुंचा दिया है।लगातार हवाई हमलों और नाकेबंदी के चलते 66,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
भोजन और दवाइयों की भारी कमी के कारण गाज़ा में मानवीय आपदा जैसी स्थिति बनी हुई है।
दुनियाभर के संगठन राहत सामग्री भेजने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इजरायली नाकेबंदी के चलते ये प्रयास अक्सर बाधित हो जाते हैं।