‘गांधी सत्य, संघ हिंसा’ तुषार गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस का भाजपा- संघ पर बड़ा हमला
काँग्रेस का RSS पर हमला, “महात्मा गांधी के आगे समर्पण करना संघ की वैचारिक हार”
नागपुर। दीक्षाभूमि से निकली संविधान सत्याग्रह पदयात्रा में महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और महात्मा गांधी की विचारधाराओं के बीच गहरे मतभेद को खुलकर बताया। महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी की मौजूदगी में सपकाल ने कहा, “महात्मा गांधी सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय के प्रतीक थे, जबकि संघ का इतिहास असत्य और हिंसा से जुड़ा रहा है। गांधी के आगे झुकना संघ की वैचारिक पराजय है।”
क्या कहा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने
गांधी का दृष्टिकोण सत्य, अहिंसा, समावेशी राष्ट्रवाद और सर्वधर्म समानता का था जबकि संघ की विचार धारा हिंदुत्व आधारित सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, जहां धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय एकता का आधार माना गया है।
सपकाल ने आरोप लगाया कि “स्वतंत्रता आंदोलन के समय संघ ने गांधीजी को देश विभाजन का जिम्मेदार ठहराया, जबकि द्विराष्ट्रवाद का विचार कहीं और से आया था। आज वही संघ गांधी के आगे नतमस्तक हो रहा है, जो उसकी वैचारिक जमीन खिसकने का सबूत है।”
सपकाल ने कहा कि भाजपा ने सत्ता पाने के लिए झूठ का सहारा लिया, लेकिन आज भी महात्मा गांधी का नाम उनके सिर पर बोझ की तरह टिका हुआ है। उन्होंने कहा, “संघ के 100वें वर्ष में उनके पास मौका है कि वे संविधान और गांधीवादी विचारों को अपनाएं। मगर अब तक संघ की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला।”
कांग्रेस नेताओं ने दोहराया कि गांधीवाद और संविधान आज के भारत की आत्मा हैं। यही कारण है कि पदयात्रा के जरिए जनता को याद दिलाया जा रहा है कि “असली भारत गांधी के रास्ते पर ही बसता है, न कि विभाजनकारी विचारों पर।”
पदयात्रा में गांधी परिवार की मौजूदगी
इस पदयात्रा में हर्षवर्धन सपकाल के साथ महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी, आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष वसंत पुरके समेत कई नेता शामिल हुए।
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