कफ सिरप पर सवाल: छिंदवाड़ा और सीकर में बच्चों की मौत से मचा हड़कंप,

भोपाल/जयपुर। मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों के अनुसार, इन मामलों में बच्चों को शुरुआत में सर्दी, खांसी और बुखार जैसे लक्षण थे, लेकिन बाद में उनकी किडनी फेल हो गई। आशंका जताई जा रही है कि कुछ कफ सिरप इन मौतों की वजह हो सकते हैं, हालांकि सरकार ने अभी इस बात की पुष्टि नहीं की है।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 4 से 26 सितंबर के बीच छह बच्चों की मौत हुई है। परिजनों का कहना है कि सभी बच्चों को पहले जुकाम और बुखार हुआ था, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ती चली गई और अंत में किडनी फेल हो गई। जिला प्रशासन ने बताया कि इन मौतों की जांच के लिए केंद्र और राज्य स्तर की टीमें तैनात की गई हैं। पानी, दवा और अन्य सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है। मृत बच्चों के घरों से कुछ कफ सिरप भी मिले हैं, जिनकी बिक्री को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इस समय पांच बच्चे नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं।
छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने बताया कि भोपाल से विशेषज्ञ टीमें जांच कर रही हैं और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को कोई भी कफ सिरप न दें।
इसी तरह राजस्थान के सीकर जिले में भी एक बच्चे की मौत के बाद कफ सिरप पर शक जताया जा रहा है। इस घटना के बाद राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन ने 19 बैच के कफ सिरप की बिक्री और उपयोग पर रोक लगा दी है। साथ ही सभी डॉक्टरों और दवा दुकानदारों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि अभी यह साबित नहीं हुआ है कि मौतें कफ सिरप से हुई हैं। उन्होंने बताया कि नमूने आईसीएमआर और नागपुर की लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आ पाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को कोई दवा न दें, केवल लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें और किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत अस्पताल से संपर्क करें।