POK में बगावत ! इस्लामाबाद से भेजे 3000 सैनिक, शौकत नवाज मीर ने की बड़ी बगावत

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। यहां जनता ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पीओके पब्लिक एक्शन कमिटी के प्रमुख शौकत नवाज मीर की अपील पर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे हैं।
स्थिति को काबू में करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने करीब 3000 सैनिकों को तैनात किया है, लेकिन हालात अब भी नियंत्रण से बाहर हैं।
विरोध की वजह
शौकत मीर के नेतृत्व वाली पब्लिक एक्शन कमिटी ने सरकार से वीआईपी कल्चर खत्म करने और 35 अहम मांगों पर जवाब मांगा है। इन मांगों में महंगाई पर रोक, आटा-दाल समेत रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतें कम करना और भेदभाव खत्म करना प्रमुख है। कमिटी का आरोप है कि सरकार उनकी बात मानने के बजाय सेना के बल से आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
शौकत मीर कौन हैं?
शौकत नवाज मीर ने कश्मीर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। भ्रष्टाचार व महंगाई के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहे है । वे ट्रेड यूनियन और सामाजिक संगठनों से जुड़े रहे और पूरे पीओके में अपनी पकड़ बनाई।
2024 में महंगाई के खिलाफ उनके आंदोलनों ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया।
विरोध प्रदर्शनों के दबाव में उस वक्त सरकार को आटा-दाल समेत कई जरूरी सामानों के दाम घटाने पड़े थे। उनकी बढ़ती लोकप्रियता और भाषण देने की कला के चलते उन्हें पब्लिक एक्शन कमिटी का प्रमुख चुना गया। गौरतलब है कि इसी साल पीओके हाईकोर्ट ने सरकार के दबाव में उन्हें ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश दिया था।
मीर की अपील पर लॉकडाउन
28 सितंबर को शौकत मीर ने मुजफ्फराबाद के लाल चौक पर लोगों से जुटने की अपील की थी। इस अपील पर करीब 10,000 से ज्यादा लोग लाल चौक पर इकट्ठा हुए। मीर ने 17 मिनट का भाषण दिया और ऐलान किया कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक पीओके में अनिश्चितकालीन लॉकडाउन रहेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज सुनने के बजाय सेना के जरिए लाठीचार्ज और गोलीबारी करवा रही है। सेना की गोलीबारी में अब तक 2 लोगों की मौत की खबर है। इसके बाद पूरे पीओके में लॉकडाउन जैसी स्थिति बन गई है।
हालात काबू से बाहर
मुजफ्फराबाद में तैनात पाकिस्तानी सेना हालात सामान्य करने की कोशिश कर रही है, लेकिन जनता के जबरदस्त समर्थन के कारण वह कोई बड़ा कदम उठाने में नाकाम रही है।
पीओके में सरकार और जनता के बीच यह टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है और स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है।
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