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मुंगेर विधानसभा चुनाव, BJP–JDU और RJD–महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला

मुंगेर विधानसभा

मुंगेर विधानसभा सीट बिहार की महत्वपूर्ण स्विंग सीट है।

2025 में BJP–JDU और RJD–महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला

जातीय समीकरण और उम्मीदवार की भूमिका अहम।

 

मुंगेर, बिहार: गंगा किनारे स्थित मुंगेर विधानसभा सीट बिहार की राजनीति में हमेशा महत्वपूर्ण रही है। यह क्षेत्र केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जाता है। पिछले तीन चुनावों के परिणाम बताते हैं कि यह सीट किसी एक दल की स्थायी संपत्ति नहीं रही है। हर चुनाव में समीकरण बदलते रहे हैं और परिणाम अप्रत्याशित रहे हैं। 2025 के चुनाव में जातीय समीकरण, गठबंधन की मजबूती और उम्मीदवार की छवि निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

पिछले चुनावों का संक्षिप्त विवरण

2010: जेडीयू के अनंत कुमार सत्यार्थी ने आरजेडी की शबनम परवीन को हराया। उन्हें करीब 42% वोट मिले। जीत का अंतर लगभग 17,600 वोट का रहा।

2015: आरजेडी के विजय कुमार यादव ने बीजेपी के प्रणव कुमार को 4,300 वोटों के अंतर से हराया। मुकाबला बेहद कड़ा था।

2020: बीजेपी के प्रणव कुमार ने आरजेडी के अविनाश विद्यार्थी को मात्र 1,244 वोटों (लगभग 0.7%) के अंतर से हराया। यह परिणाम दिखाता है कि सीट पर मतदाता पूरी तरह बंटे हुए हैं और यह “स्विंग” ज़ोन बनी हुई है।

 

जातीय समीकरण

ओबीसी/ईबीसी (कुर्मी, कुशवाहा, धनुक आदि): सबसे बड़ा समूह, अक्सर किंगमेकर की भूमिका।

यादव मतदाता: पारंपरिक रूप से आरजेडी का आधार, लेकिन टूट-फूट होने पर समीकरण बदल जाता है।

उच्च जाति (भूमिहार, राजपूत, वैश्य): बीजेपी और जेडीयू का स्थायी वोट बैंक।

मुस्लिम और अनुसूचित जाति (SC): निर्णायक, विशेषकर जब मुकाबला त्रिकोणीय हो।

प्रमुख चुनावी मुद्दे

रोज़गार और पलायन: युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन।

शिक्षा और स्वास्थ्य: कॉलेज और अस्पतालों की कमी।

सड़क और बुनियादी ढाँचा: अधूरी परियोजनाएँ और जर्जर सड़कें।

क़ानून–व्यवस्था: अपराध और अवैध हथियारों की समस्या।

कृषि और बाढ़: गंगा किनारे बाढ़ और किसानों की समस्याएँ।

 

2025 की तैयारियाँ

 

एनडीए (भाजपा–जेडीयू):

बीजेपी ने 2020 में मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी। 2025 में उन्हें जेडीयू के आधार वोट और संगठनात्मक ताकत पर भरोसा है। छोटे मार्जिन वाली जीत यह दर्शाती है कि मामूली चूक भी भारी पड़ सकती है।

महागठबंधन (राजद–कांग्रेस):

राजद यादव–मुस्लिम समीकरण को साधने में सक्रिय है। ओबीसी/ईबीसी और उच्च जातियों में पकड़ मजबूत करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। सही उम्मीदवार का चयन उनके लिए निर्णायक साबित होगा।

छोटी पार्टियाँ (बसपा, एआईएमआईएम, लोजपा आदि):

ये दल वोट बंटवारे का काम कर सकते हैं। यदि मुस्लिम या दलित वोट बिखरते हैं तो राजद को नुकसान और बीजेपी को लाभ हो सकता है।

असर और संभावनाएँ

मुंगेर विधानसभा सीट पर पिछले तीन चुनावों में लगातार पाला बदला है। यह दर्शाता है कि मतदाता किसी एक दल को लगातार मौका नहीं देते। भाजपा ने 2020 में बेहद कम अंतर से जीत दर्ज की थी, लेकिन यह जीत उनकी “सेफ सीट” की गारंटी नहीं है।

2025 का बड़ा सवाल यह है:

क्या बीजेपी–जेडीयू गठबंधन अपनी बढ़त बनाए रखेगा?

या राजद–महागठबंधन यादव–मुस्लिम और पिछड़ा वोटों को साधकर वापसी करेगा?

मुंगेर का नतीजा केवल इस सीट तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर आसपास की सीटों और पटना से लेकर सीमांचल तक की राजनीति पर भी दिखाई देगा।

Shashwat Srijan

Content Writer

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