आज नवरात्रि का आठवाँ दिन है — जानिए माँ महागौरी की पूजा विधि, शुभ रंग और वो रहस्य जिससे दूर होंगे ग्रहदोष और जीवन में आएगी शांति व समृद्धि।
क्या आप जानते हैं कि सिर्फ एक दिन की पूजा से जीवन के सारे पाप मिट सकते हैं और हर कठिनाई का अंत हो सकता है? नवरात्रि का आठवाँ दिन, माँ महागौरी की आराधना के लिए बेहद खास है। माँ महागौरी को शांति, पवित्रता और आत्मशुद्धि की देवी माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से न सिर्फ जीवन की अंधकारमयी शक्तियाँ नष्ट होती हैं बल्कि राहु दोष जैसे ग्रहदोष भी दूर हो जाते हैं। आइए जानते हैं, क्यों माँ महागौरी का यह दिन भक्तों के लिए सबसे शुभ और चमत्कारी माना जाता है।
माँ महागौरी कौन हैं?
“महागौरी” नाम में ही उनकी पहचान छुपी है “महान” + “गौरी” अर्थात अत्यंत श्वेत, पवित्र, और निर्मल रूप। वे देवी दुर्गा की आठवीं स्वरूप हैं और शुद्धता, शांति, और आत्मशुद्धि की प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं। वे श्वेत वस्त्र में सजी होती हैं और साधारणतः सफेद वर्ण की मानी जाती हैं। वे भैंस या बैल वाहन पर विराजमान रहती हैं। उनके पास चार भुजाएँ होतीं हैं एक में त्रिशूल (तीर), एक में डमरू (छोटा ढोल), और एक हाथ वरद मुद्रा (आशीर्वाद देने वाला), और एक अभय मुद्रा (भय न करो) में होता है। उनकी कथा कहती है कि पार्वती ने कठोर तपस्या की और अंततः उन्हें शिव ने गंगा जल से स्नान कराकर उनका रूप श्वेत किया इस तरह वे शुद्ध और गौरी (स्वच्छ) बनीं।
इस प्रकार, माँ महागौरी हमें यह संदेश देती हैं कि चाहे कितनी भी अँधेरापन हो, शुद्धता, भक्ति और तपस्या द्वारा आत्मा को उजाला मिल सकता है।
तिथि, रंग और शुभ मुहूर्त
इस दिन मोर-हरा / Peacock Green रंग शुभ माना गया है यह रंग शांति, सुधार और नई शुरुआत का प्रतीक है। पूजा के लिए उपयुक्त समय निम्नलिखित मुहूर्तों के आस-पास माना जाता है: सुबह का समय, मुहूर्त, और शाम के कुछ शुभ घंटे। इस दिन की पूजा विशेष रूप से राहु ग्रह से संबंधी ऊर्जा को शुद्ध करने और उसे नियंत्रित करने में सहायक मानी जाती है।
पूजा विधि: चरण दर चरण
नीचे एक सरल, भक्तिपूर्ण विधि है जिसे आप अपनाकर माँ महागौरी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं:
1. स्वच्छता व तैयारी
सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और सफेद या हल्के रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें।
2. घटस्थापना / कलश पूजा
कलश या घट स्थापित करें जिसमें जल, नवधान्य (नौ प्रकार के अनाज), सुपारी आदि रखें। यदि कलश पहले से हो, उसे उसी स्थान पर पूजन में शामिल करें।
3. मूर्ति / चित्र स्थापना और सजावट
महागौरी की मूर्ति या चित्र को पूजा स्थल पर रखें। उन्हें सफेद या हल्के रंगों से सजाएँ, सफेद फूल और चावल, अक्षत आदि अर्पित करें।
4. मनोनयन और मंत्र जाप
पूजा शुरू करते समय मन में संकल्प लें कि आप इस दिन भक्ति, शुद्धता और शांति की ओर अग्रसर होंगे।
मुख्य मंत्र है: “ॐ देवी महागौर्यै नमः”
इसके अतिरिक्त “ॐ ह्रीं महागौर्यै नमः” जैसे बीज मंत्रों का जप भी शुभ माना जाता है।
5. अभिषेक एवं अर्पण
पंचामृत (दूध, दही, घृत, शहद, गंगाजल) से अभिषेक करें। फिर सफेद फूल, श्वेत फल (जैसे केले), नारियल, हलवा, और सफेद मिठाईयां अर्पित करें।
6. दीप, धूप, आरती
दीप जलाएँ, धूप करें और अंत में आरती करें। भक्तिमय भजन एवं कीर्तन इस समय माहौल को दिव्य बना देते हैं।
7. कन्या पूजा / कुमारी वंदना
कुछ स्थानों पर इस दिन कन्या पूजा की भी परंपरा है छोटी लड़कियों को देवी रूप में पूजकर उन्हें भोजन, उपहार और आशीर्वाद दिया जाता है।
8. प्रसाद वितरण एवं व्रत
पूजा के बाद प्रसाद बाँटें। यदि व्रत रखा हो, तो सात्विक भोजन करें।
9. ध्यान एवं आत्म चिंतन
पूजा के बाद कुछ समय ध्येय रखें — अपने अंदर शुद्धता, मन की शांति और दोषों से मुक्ति की चाह जगाएँ।

महत्व और संदेश
पापों का नाश: माना जाता है कि महागौरी की पूजा करने से बीते पाप और गलतियाँ धुल जाती हैं।
आत्मिक शुद्धि: वे भक्तों की आत्मा को शुद्ध करने वाली शक्तिमयी देवी हैं, जो अंतर्मन को शांत करती हैं।
शांति और सामंजस्य: उनके आशीर्वाद से जीवन में शांति, संतुलन और सामंजस्य बढ़ता है — विशेषकर उन लोगों के लिए जो तनाव, अशांति से जूझ रहे हैं।
नव आरंभ और सकारात्मक ऊर्जा: जैसा कि आठवां दिन नौ दिवसीय यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, यह दिन नव ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है।
राहु दोष शमन: ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, यदि किसी व्यक्ति को राहु दोष हो, तो महागौरी पूजा उस दोष को कम करने में सहायक मानी जाती है।
उपाय और सुझाव
हरी / मोर-हरा रंग पहनें: इस दिन मोर-हरा रंग शुभ माना गया है यदि संभव हो, वैसा वस्त्र पहनें।
सफेद फूलों का प्रयोग: पूजा में सफेद गुलाब, चंदन, चमेली आदि का प्रयोग करें।
हल्का व्रत: यदि स्वास्थ्य अनुमति हो, हल्का व्रत करें या सात्विक भोजन लें।
दान-पुण्य करें: भोजन, वस्त्र, अनाज आदि की दान-प्रथा करें — इससे पुण्य बढ़ता है और मन को आनंद मिलता है।
भजन-कीर्तन और कथा: इस दिन महागौरी की कथा पढ़ें या सुनें, भजन-कीर्तन करें — इससे भक्तिमय वातावरण और जागृति बढ़ती है।
भावनात्मक अनुभव और मनन
आठवाँ दिन ऐसा अवसर है जब नवरात्रि की तीव्रता अपने चरम पर होती है अँधेरे रूपों की पूजा से उजाले रूप की ओर यात्रा। जब आप महागौरी की उपासना करते हैं, यह क्षण हो सकता है जब आप मन-ह्रदय से कहें: “मेरी तमस, मेरी अशुद्धि मिट जाओ, मुझे शुद्धता और शांति दो।”
यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि चाहे जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ हों अंत में शुद्धता, सच्चाई और आत्मा की शक्ति ही विजय पाती है। पूजा करते समय उसकी शुद्धता को अपने भीतर उतारने का प्रयास करें और देखें कैसे आत्मा का उजाला फैलता है।
आपको इस पवित्र दिन की बहुत-सी शुभकामनाएँ माँ महागौरी आपके जीवन में शांति, प्रकाश और सच्ची शुद्धता लाएँ। जय माँ महागौरी!