त्योहारों से पहले RBI का बड़ा ऐलान! क्या आपकी कार और होम लोन की EMI कम होने वाली है?

मुंबई में आज से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में 1 अक्टूबर को सुबह 10 बजे RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा रेपो रेट का ऐलान करेंगे।
त्योहारों के सीजन और जीएसटी में हाल ही में की गई कटौती के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं कि कार और होम लोन जैसे कर्ज पर राहत मिल सकती है। लेकिन, विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार दरों में कटौती की संभावना काफी कम है।
विशेषज्ञों का अनुमान
अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव और मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए कई विशेषज्ञों का मानना है कि RBI इस बार रेपो रेट को 5.5% पर बरकरार रखेगा। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म नुवामा का मानना है कि अभी भी दरों में कटौती की उम्मीद बनी हुई है।
रेपो रेट क्या होता है?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक देश के सभी बैंकों (सरकारी और प्राइवेट) को लोन देता है। इसी आधार पर बैंकों की ब्याज दरें तय होती हैं और इसका सीधा असर जनता की EMI पर पड़ता है। अगर रेपो रेट घटता है तो EMI सस्ती होती है, और बढ़ने पर महंगी।
क्या कहता है रॉयटर्स का पोल?
रॉयटर्स के पोल के अनुसार, देश के करीब तीन चौथाई अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि इस बार दरों में कटौती की संभावना नहीं है। वहीं दूसरी ओर सिटी, बार्कलेज, कैपिटल इकोनॉमिक्स और एसबीआई जैसे बड़े संस्थानों का कहना है कि आर्थिक विकास पर दबाव और महंगाई में कमी की वजह से RBI कटौती पर विचार कर सकता है।
साल की शुरुआत में RBI ने 100 बेसिस प्वाइंट तक दरें घटाई थीं, लेकिन इसके बावजूद निजी निवेश कमजोर बना हुआ है। अगस्त की पॉलिसी मीटिंग में RBI ने दरों को यथावत रखते हुए न्यूट्रल स्टांस बनाए रखा था।
एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट
एसबीआई की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार मौद्रिक नीति समिति 25 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जून के बाद दरों को कम करना मुश्किल था, लेकिन अब अगर दरें कम नहीं की गईं तो यह गलती होगी।
रिपोर्ट का अनुमान है कि जीएसटी कटौती के बाद अक्टूबर में महंगाई 1.1% तक जा सकती है, जो 2004 के बाद सबसे कम होगी। ऐसे में अगर RBI समय रहते कटौती करता है तो यह एक ‘forward-looking central bank’ की छवि पेश करेगा। दरें घटाने से न केवल महंगाई नियंत्रित रहेगी, बल्कि आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा।