आज नवरात्रि का छठा दिन है — जानिए माँ कात्यायनी की पूजा विधि, शुभ रंग, मंत्र और वो रहस्य जिससे जीवन में आएगा आत्मविश्वास और सफलता की नई किरण।
जानिए नवरात्रि 2025 के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा विधि, शुभ रंग ग्रे, मंत्र “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः”, और उपाय जिससे विवाह में बाधाएँ दूर हों और जीवन में आत्मविश्वास बढ़े।
क्या आप जानते हैं कि एक ही दिन की पूजा से विवाह में आ रही रुकावटें दूर हो सकती हैं और जीवन में साहस की नई रोशनी जग सकती है? नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी को समर्पित है वो देवी जिन्हें शक्ति, न्याय और साहस की साक्षात मूर्ति माना जाता है। कहा जाता है कि उनकी आराधना से शत्रु नष्ट होते हैं, विवाह के योग मजबूत होते हैं और भीतर छुपी आत्मशक्ति जाग उठती है। आइए जानते हैं, क्यों इतना खास है माँ कात्यायनी का दिन और कैसे उनकी पूजा आपके जीवन की दिशा बदल सकती है।
माँ कात्यायनी कौन हैं?
माँ कात्यायनी को युद्ध, साहस और न्याय का अवतार माना जाता है। उनका जन्म ऋषि कात्यायन की तपस्या के फलस्वरूप हुआ था इसलिए उन्हें “कात्यायनी” कहा जाता है। वे सिंह पर सवार होती हैं, और हाथों में तलवार, कमल आदि धारण करती हैं उनके एक हाथ अभय मुद्रा और दूसरे वरदान मुद्रा में होते हैं। कात्यायनी माता का रूप भयंकर होते हुए भी भक्तों के लिए दाता, और दोषों को नष्ट करने वाली देवी माना जाता है।
तिथि, रंग और शुभ मुहूर्त
६ठा दिन नवरात्रि के अनुसार यह दिन 27 सितंबर 2025 को होगा। इस दिन का शुभ रंग ग्रे (grey / slate / धूसर) माना गया है, जो संतुलन और स्थिरता को दर्शाता है।
पुजा मुहूर्त (कुछ महत्वपूर्ण समय):
• शुक्ल षष्ठी शुरू: 12:03 PM
• ब्रह्म मुहूर्त: 4:36 AM – 5:24 AM
• अभिजीत मुहूर्त: 11:48 AM – 12:36 PM
• विजय मुहूर्त: 2:12 PM – 3:00 PM
इन समयों में पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है।
पूजा-विधि: चरण दर चरण
ये साधारण लेकिन प्रभावी तरीके से माँ कात्यायनी की पूजा की विधि दी गई है:
1. स्वच्छता एवं तैयारी
सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को साफ करें।
2. कलश स्थापना / घटस्थापना
यदि कलश नहीं रखा हो तो कलश स्थापना करें, उसमें जल, नौ प्रकार के अनाज आदि रखें।
3. मूर्ति / चित्र पूजा
माँ कात्यायनी की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें, उन्हें पुष्प, रंगीन चंदन, श्रृंगार आदि से सजाएँ।
4. मंत्र जाप एवं आह्वान
मुख्य मन्त्र: “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः”
अन्य प्रार्थना / स्तुति:
“चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी।”

5. अभिषेक एवं अर्पण
पंचामृत (दूध, दही, घृत, शहद, गंगाजल) से अभिषेक करें। फिर मीठे पान, पांच प्रकार के मौसमी फल, मधु (शहद) या सिंपल मिठाइयाँ अर्पित करें।
6. आरती एवं हवन
दीप जलाएँ, धूप करें, हवन करें और आरती करें। भजन-कीर्तन माहौल को भक्तिमय बनाएंगे।
7. प्रसाद वितरण एवं व्रत
पूजा के बाद प्रसाद बाँटें। यदि व्रत रखा हो तो सात्विक भोजन से दिन पूरा करें।
8. ध्यान एवं मनन
पूजा के बाद कुछ समय ध्यान करें। माँ कात्यायनी की शक्ति, न्यायप्रियता और बाधाओं को हरने की भावना पर मनन करें।
महत्व और संदेश
विपत्तियों से लड़ने की शक्ति: कात्यायनी देवी बाधाएँ और नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करने वाली मानी जाती हैं।
विवाह-वास्तविकता का वर: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, अविवाहित कन्याएँ इस दिन कात्यायनी पूजा कर पति की प्राप्ति की कामना करती हैं।
न्याय और दृढ़ता: उनके रूप से हमें यह शिक्षा मिलती है कि धर्म, न्याय और आत्मबल के साथ संघर्ष करना चाहिए।
अंतर्मन की शक्ति जाग्रत करना: पूजा करने पर भीतर की शक्ति, आत्मविश्वास और आसमान छूने की प्रेरणा मिलती है।
उदाहरण उपाय और सुझाव
ग्रे रंग पहनें: दिन के रंग के रूप में ग्रे पहनने की कोशिश करें — संतुलन की भावना बनाए रखे।
पान और फल अर्पित करें: मीठा पान और पाँच फल अर्पण करना शुभ माना जाता है।
साधारण भोजन या व्रत रखें: यदि स्वास्थ्य अनुकूल हो, व्रत रखें या हल्का और सात्विक भोजन करें।
दान करें: जरूरतमंदों को भोजन, अनाज या वस्त्र का दान करें इससे पूजा का पुण्य बढ़ता है।
भजन-कीर्तन और कथा सुनें: इस दिन की कथा सुनने या गाने से भक्ति भाव और दृढ़ होता है।
भावनात्मक अनुभव और ध्यान
छठे दिन की पूजा करते समय, यह अवसर आता है यह देखने का कि आपके जीवन में कौन सी बाधाएँ, डर या असमर्थताएँ हैं। वह शक्ति, जो भीतर छुपी है, जागृत होती है। जब आप पूजा करते हैं, मंत्र जपते हैं और ध्यान करते हैं, तो यही क्षण है जब अँधेरे को चीरकर अंदर की रोशनी बाहर निकलती है।