जोड़ों का दर्द हो या तनाव, लोग अब दवाइयों से ज़्यादा भरोसा कर रहे हैं काढ़ा, पंचकर्म और योग पर—जानिए पोस्ट-कोविड दुनिया में कैसे बदली आम लोगों की हेल्थ लाइफ़स्टाइल।
क्या आपने गौर किया है, कोरोना महामारी के बाद लोग अब दवाइयों की जगह देसी इलाज़ और आयुर्वेदिक नुस्खों को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। अगर आपके आस-पास भी कोई नीम की पत्तियों का काढ़ा पी रहा है, या फिर पंचकर्म के लिए क्लिनिक जा रहा है तो समझ लीजिए कि भारत में AYUSH ट्रीटमेंट्स (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी) का चलन फिर से तेजी से लौट आया है।
हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में बताया गया कि तमिलनाडु के त्रिची जैसे शहरों में पोस्ट-कोविड मरीज बड़ी संख्या में AYUSH अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। खासतौर पर जोड़ों के दर्द, सांस की समस्या और क्रॉनिक बीमारियों के लिए।

क्यों बढ़ा AYUSH का आकर्षण?
कोविड ने हम सभी को यह सिखाया कि केवल ऐलोपैथिक दवाओं पर निर्भर रहना काफी नहीं है। इम्यूनिटी बढ़ाना और शरीर को प्राकृतिक रूप से हेल्दी बनाए रखना भी उतना ही ज़रूरी है। लोग अब ऐलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभाव से डरने लगे हैं और चाहते हैं कि इलाज ऐसा हो जो धीरे-धीरे असर करे।
आयुर्वेद, सिद्धा और योग में पूरे शरीर के उपचार पर ध्यान दिया जाता है। यानी केवल बीमारी नहीं, बल्कि जीवनशैली भी सुधारने पर फोकस है।
WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने भी हाल ही में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल करने पर ज़ोर दिया है।
आयुर्वेदिक इलाज़ की डिमांड क्यों बढ़ी?
त्रिची के एक AYUSH अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, कोविड के बाद जोड़ों का दर्द, श्वसन संबंधी समस्याएं और चिंता के केस ज़्यादा देखने को मिल रहे हैं। आयुर्वेदिक काढ़ा और औषधियाँ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में काफी सफल साबित हो रही है। सिद्धा और होम्योपैथी ट्रीटमेंट लंबे समय से चल रही बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए काफी असरदार है। पंचकर्म थेरेपी शरीर को विष मुक्त बनाने और तनाव कम करने के लिए बेहद मददगार है।
एक स्टडी (Journal of Ayurveda and Integrative Medicine, 2022) के अनुसार, 65% लोगों ने माना कि आयुर्वेदिक नुस्खे अपनाने के बाद उन्हें बेहतर नींद, ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता महसूस की गई है।

सरकार और AYUSH मिशन
भारत सरकार ने भी राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के तहत आयुष अस्पतालों और वेलनेस सेंटर्स को बढ़ावा दिया है। तमिलनाडु, केरल और उत्तराखंड जैसे राज्यों में AYUSH क्लिनिक्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। AIIMS दिल्ली और कई बड़े अस्पतालों ने भी “इंटीग्रेटेड मेडिसिन यूनिट” शुरू की है, जहाँ आयुर्वेद और एलोपैथी साथ मिलकर इलाज देते हैं।
विदेशों में भी बढ़ी डिमांड
सिर्फ भारत ही नहीं, अमेरिका, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में भी लोग आयुर्वेद और योग को अपना रहे हैं। Yoga Alliance USA की रिपोर्ट बताती है कि केवल अमेरिका में ही 3.6 करोड़ लोग योग कर रहे हैं। वहीं, आयुर्वेदिक सप्लीमेंट्स और हर्बल प्रोडक्ट्स का ग्लोबल मार्केट सालाना 12% की दर से बढ़ रहा है।
आज Gen Z भी ग्रीन टी, हर्बल ऑयल, योगा और ध्यान की ओर बढ़ रही है। यानी AYUSH अब केवल बुजुर्गों का इलाज नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल चॉइस बन चुका है।
