Navratri Day 3: नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना से मिलता है साहस, शांति और सुख-समृद्धि — जानिए पूजा विधि और शुभ रंग का महत्व।
नवरात्रि का तीसरा दिन, माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप को समर्पित है। इनके माथे पर अर्धचंद्र की आभा और गले में बजती घंटी का स्वर बुरी शक्तियों का नाश कर देता है। मान्यता है कि इस दिन सही विधि से पूजा करने से साहस, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। तो आइए जानें, क्यों इतना खास है माँ चंद्रघंटा का दिन और किस तरह इनकी कृपा से जीवन हो सकता है निर्भय और सुखमय।
माँ चंद्रघंटा कौन हैं?
नाम में ही उनकी विशेषता छिपी है — चंद्र (चाँद) + घंटा (घंटी)। जैसे चाँद की अर्धचन्द्रिका घंटी की तरह माथे पर सजी हो, वह हैं माँ चंद्रघंटा। ये देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं। उनके दस हाथ होते हैं, जिनमें विभिन्न अस्त्र-शस्त्र, कमंडल, जपमाला, कमल आदि हैं, और वे सिंह या बाघ की सवारी करती हैं। उनका स्वरूप यह दर्शाता है कि वे शक्ति और शांति का योग हैं ।
तिथि, मुहूर्त और शुभ समय
नवरात्रि का तीसरा दिन जो तृतीया तिथि के शुक्ल पक्ष को आता है। इस दिन का विशेष रंग है रॉयल ब्लू है, जो शांति, गहराई, समृद्धि और आध्यात्मिक स्थिरता का प्रतीक है। इस दिन मुहूर्तों में अमृतकाल, विशेष समय जैसे प्रातः काल, आदि शामिल हैं (जैसे 9:11 से 10:57 आदि) अलग अलग पंचांगों में थोड़ा समय बदल सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग देखें।
पूजा विधि: कैसे करें श्रद्धा से?
यहाँ एक सरल-विधि दी है जिसे आप अपनाकर माँ चंद्रघंटा की पूजा कर सकते हैं:
1. तैयारियाँ
सुबह जल्दी उठें, स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को स्वच्छ करें। पूजा की थाली, कलश, पुष्प, दीपक-मोमबत्ती, धूप-बत्ती आदि पहले से तैयार रखें।
2. घटस्थापन
कलश स्थापित करें, बीच में जल भरें, नौ प्रकार के अनाज (नवधान्य), सुपारी, फूल-पत्ते रखें। कलश पर नारियल रखें।
3. माँ चंद्रघंटा का आह्वान
“ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” मंत्र से देवी का आह्वान करें। उनकी मूर्ति या चित्र के समक्ष दीप, धूप, पुष्प, फल और मिठाई अर्पित करें।
4. अभिषेक एवं आरती
मूर्ति पर पंचामृत (दूध, दही, घृत, शहद, गंगा जल) से अभिषेक करें। फिर उनका श्रृंगार करें — वस्त्र, श्रृंगार, फूल आदि से सजा कर रखें। आरती करें।
5. भोग एवं व्रत
यदि व्रत रखते हैं, तो फलाहार या निर्जल व्रत करें। पूजा के बाद भोग अर्पण करें और बाँटें। दान-पुण्य करें — इससे पुण्य की वृद्धि होती है।
6. ध्यान एवं मन का शुद्धिकरण
पूजा के बाद कुछ समय ध्यान करें, चंद्रघंटा के गुणों — शांति, निर्भयता, करुणा — का चिंतन करें। मन में सकारात्मक विचारों को स्थान दें।

महत्व: चंद्रघंटा से क्या सीख मिलती है?
निर्भयता (Fearlessness): जीवन में डर हों, उलझन हों तो माँ चंद्रघंटा की पूजा हमें डर को पार करने और साहस से आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
मानवता और करुणा: शक्तिमय होते हुए भी करुणा का भाव बनाए रखना। उनकी पूजा में यही संतुलन है — शक्ति और शांति दोनों।
मानसिक शांति: समस्याएं के समय में मन को शांत रखने, निर्णय लेने में धैर्य और स्थिरता लाने की शक्ति।
अन्तरात्मा की ओर झुकाव: भौतिक आग्रहीपन से ऊपर उठकर आंतरिक विकास, अध्यात्मिक जागरूकता की ओर ध्यान देना।
इस दिन के लिए कुछ विशेष उपाय और सुझाव
इस दिन रॉयल ब्लू रंग के वस्त्र पहनें— यह न सिर्फ शुभ माना जाता है, बल्कि मन को एक आध्यात्मिक टोन देता है। पूजा स्थान पर नीली या हल्की-नीली सजावट करें। यदि संभव हो, तो मधुर-गायन, भक्ति गीत, स्तुति पाठ करें चंद्रघंटा देवी के गुणों की — इससे वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
उपवास रखें या न्यूनतम भोजन करें, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्रत के दौरान हल्का और सुपाच्य भोजन लें।
दूसरों के लिए दान करें — अन्न, कपड़े या जरूरतमंदों को सहयोग; इससे मन में प्रसन्नता और पुण्य की अनुभूति होती है।
अनुभव और भावनाएँ
तीसरा दिन ऐसा दिन है जब नवरात्रि का मध्य-पहला चरण समाप्त हो चुका है, और उत्सव, भक्ति और आध्यात्म की ऊर्जा और गहराई में जाने का समय है। जब आप माँ चंद्रघंटा की पूजा करते हैं, तो यह मौका है अपने अंदर की शक्ति की पहचान करने का — उन हिस्सों को जगाने का जो डरते हैं, पीछे हटते हैं।
नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा के नाम है — देवी जो हमें सिखाती हैं कि शक्ति केवल बाहरी अस्त्र-शस्त्र में नहीं है, बल्कि धैर्य, साहस और करुणा के मेल में होती है। यदि आप इस दिन की विधिपूर्वक पूजा करें, रंग-रूप, मन की शुद्धि और सच्चे भाव से भक्ति करें, तो निश्चित ही आपका जीवन कुछ नया अनुभव करेगा — आत्मविश्वास, शांति और सकारात्मक बदलाव का स्पर्श।