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फ़ास्ट फ़ैशन के दौर में भी Handloom और Heritage fashion क्यों बन रही युवाओं की पहली पसंद ?

दादी-नानी की आलमारी से इंस्टाग्राम तक: क्यों Gen Z दीवानी हो रही है बनारसी, पटोला और चिकनकारी की?

फ़ास्ट फ़ैशन के दौर में भी पारंपरिक handloom और heritage fashion बना युवाओं की पहली पसंद—जानिए कैसे ये ट्रेंड भारत से विदेश तक छा रहा है।

क्या आपने हाल ही में इंस्टाग्राम पर कोई सेलिब्रिटी या इंफ़्लुएंसर को पाटन पटोला, बनारसी साड़ी या लखनवी चिकनकारी में देखा है? आपने नोटिस किया होगा कि इन पारंपरिक टेक्सटाइल्स में आधुनिकता और पुराने ज़माने का एक बेहतरीन मेल है।

हाल ही में एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे ने पाटन पटोला साड़ी पहनी, जिसे उन्होंने गर्व से “heritage masterpiece” बताया। उनके इस लुक ने लोगों को याद दिलाया कि हेरिटेज फैशन सिर्फ़ एक कपड़ा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान है।

फ़ास्ट फ़ैशन

क्यों हो रहा है हेरिटेज फैशन इतना पॉपुलर?

आज की भीड़ में लोग एक दूसरे से अलग दिखना चाहते हैं। एक जैसे फ़ास्ट फ़ैशन आउटफ़िट्स से हटकर, अगर कोई बनारसी या पटोला पहनता है, तो वह अपनी विशिष्ट पहचान बना लेता है। Gen Z अब फ़ास्ट फ़ैशन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को समझ रही है इसलिए अब वो हैंडलूम और हेरिटेज टेक्सटाइल्स को टिकाऊ मानते हैं जो सालों तक चलते भी हैं ये फ़ैशन में सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल ही नहीं बल्कि एथिकल भी हैं। दीपिका पादुकोण से लेकर अनुष्का शर्मा तक, कई स्टार्स ने शादी या बड़े इवेंट्स में बनारसी या चिकनकारी चुनकर इस ट्रेंड को और मज़बूत किया है।

पटोला, बनारसी और चिकनकारी: सिर्फ़ कपड़ा नहीं, इतिहास है

पाटन पटोला (Patola, Gujarat): यह डबल इकत बुनाई की अनोखी कला है, जिसकी शुरुआत 11वीं सदी में हुई थी। इसे बनाने में महीनों लगते हैं और हर साड़ी एक विरासत का एक हिस्सा मानी जाती है।

बनारसी साड़ी (Varanasi, UP): मुग़ल काल से जुड़ा यह शिल्पकारी टेक्सटाइल सोने-चाँदी के ज़री और बारीक कढ़ाई के लिए मशहूर है। ये शादी-ब्याह का “सदाबहार” विकल्प।

लखनवी चिकनकारी (Lucknow, UP): यह हाथ की बारीक कढ़ाई 2000 साल पुरानी परंपरा से जुड़ी है। हल्के सूती और मुलायम रंगों पर सफ़ेद धागे से बनी कढ़ाई, गर्मियों में ख़ास पसंद की जाती है।

Gen Z कैसे अपनाना रही है हेरिटेज फ़ैशन को?

पहले हेरिटेज फ़ैशन को सिर्फ़ शादियों या त्योहारों तक सीमित माना जाता था। लेकिन अब इंस्टाग्राम और पिंटरेस्ट पर फ्यूजन लुक्स ट्रेंड कर रहे हैं जैसे बनारसी दुपट्टा जीन्स के साथ, पटोला साड़ी को बेल्ट स्टाइल में पहनना या चिकनकारी कुर्ते को स्टाइलिश जंपसूट की तरह पहनना ।

फ़ैशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यही वजह है कि ये आर्टफॉर्म्स सिर्फ़ परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बन रहे हैं।

हेरिटेज फ़ैशन को वैश्विक मान्यता

सिर्फ़ भारत ही नहीं, विदेशों में भी इनका जलवा काफी बढ़ रहा है। 2023 में पेरिस फ़ैशन वीक में भारतीय डिज़ाइनर्स ने हैंडलूम और पारंपरिक कपड़े को प्रदर्शित किया गया था। UNESCO ने कई भारतीय हैंडलूम परंपरा को “अमूर्त सांस्कृतिक विरासत” की सूची में शामिल करने पर विचार किया है। ये सब दिखाता है कि हेरिटेज फ़ैशन अब सिर्फ़ “एथनिक वेयर” नहीं, बल्कि वैश्विक लक्जरी फैशन का हिस्सा बन चुका है।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

फ़ैशन डिज़ाइनर सबा अहमद बताती हैं:

“आज की युवा पीढ़ी प्रयोग करना चाहती है। उनके लिए हेरिटेज फ़ैशन का मतलब पुराना नहीं, बल्कि क्लासी और सस्टेनेबल है। यही कारण है कि हैंडलूम की माँग काफी बढ़ रही है।”

तो अगली बार अगर आप शॉपिंग करें, तो सिर्फ़ ब्रांडेड जींस या वेस्टर्न ड्रेसेस ही नहीं, बल्कि अपने शहर या राज्य के हैंडलूम और हेरिटेज टेक्सटाइल को भी जगह दें। क्योंकि आज हेरिटेज पहनना सिर्फ़ फैशन नहीं, बल्कि पहचान बन गई है।

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