PM मोदी के ‘जीएसटी बचत उत्सव’ पर विपक्ष का हमला: “हीरे पर नहीं, जीरे पर टैक्स लगाया”
खड़गे ने ‘गब्बर सिंह टैक्स’ कहा तो ममता ने तंज कसा – “हीरे पर नहीं, जीरे पर टैक्स लगाया है”। जानिए पूरा विवाद।
नौ सौ चूहे खाकर, बिल्ली हज को चली।” पीएम मोदी के “जीएसटी बचत उत्सव” बिफरा विपक्ष
पीएम मोदी जहां इसे “नवरात्रि पर जनता को सौगात” बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे “देर से किया सुधार और झूठी वाहवाही” करार दे रहा है। “GST सुधार नहीं, क्रेडिट लूटने का शो”
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रविवार शाम देश को संबोधन के बाद विपक्ष ने जोरदार पलटवार किया है। मोदी ने कहा था कि सोमवार 22 सितंबर से “जीएसटी बचत उत्सव” शुरू होगा और देश के लोगों को 2.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत होगी। लेकिन कांग्रेस ने इसे “सिर्फ क्रेडिट लेने की कवायद” बताते हुए सरकार को घेरा है ।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए ?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मोदी ने राष्ट्र को संबोधित कर GST काउंसिल जो कि एक संवैधानिक संस्था है के फैसलों को अपना बताया। उन्होंने आरोप लगाया –
“प्रधानमंत्री ने सुधार नहीं, बल्कि खुद को मालिक दिखाने के लिए भाषण दिया।”
जयराम रमेश ने GST को “Growth Supressing Tax” बताया और खामियां गिनाई जैसे
- बहुत ज्यादा टैक्स स्लैब
- आम जनता की चीजों पर भी भारी टैक्स
- बड़े पैमाने पर चोरी और गलत वर्गीकरण
- छोटे कारोबारियों पर भारी अनुपालन बोझ
- इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (इनपुट पर ज्यादा टैक्स, आउटपुट पर कम)
उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस 2017 से ही GST 2.0 की मांग कर रही है और 2024 के न्याय पत्र में भी यही वादा किया था।
खड़गे का तंज
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हिंदी कहावत का सहारा लेते हुए सबसे धारदार हमला बोल उन्होंने कहा
“नौ सौ चूहे खाकर, बिल्ली हज को चली।”
खड़गे बोले –
मोदी सरकार ने GST को तोड़ – मरोड़ कर ‘गब्बर सिंह टैक्स’ बना दिया है । 9 अलग अलग स्लैब लगाकर 8 साल में 55 लाख करोड़ रुपए वसूले। अब जब जनता परेशान हो चुकी है, तो “2.5 लाख करोड़ बचत उत्सव” का झुनझुना थमा रहे हैं।
खड़गे ने याद दिलाया कि सरकार ने दाल, चावल, किताबें, पेंसिल, इलाज और किसानों के ट्रैक्टर तक पर GST वसूला।
खड़गे ने तंज कसा “ये गहरे घाव देकर अब सिर्फ बैंड-एड लगा रहे हैं,”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि
“आपने हीरे पर नहीं, जीरे पर टैक्स लगाया है।” मतलब, प्रधानमंत्री जी ने रोजमर्रा की उपयोगी चीजों पर टैक्स बढ़ाया और अब राहत की बात कर रहे हैं। ममता ने कहा कि केंद्र सरकार ने “गरीबों और मध्यम वर्ग के बजट को जीएसटी के बोझ तले दबा दिया है।”