कांग्रेस ने बिहार सरकार पर आरोप लगाया कि जदयू-भाजपा गठबंधन ने गौतम अडाणी को 1,050 एकड़ जमीन 1 रुपए प्रति साल की दर पर 33 साल के लिए दी। विपक्ष ने इसे किसानों और युवाओं के साथ धोखा बताया।
कांग्रेस ने बिहार सरकार पर अडाणी समूह को 1,050 एकड़ जमीन देने का आरोप लगाया है, कहा ये किसानों और युवाओं से धोखा है।
बिहार की राजनीति में ज़मीन को लेकर बड़ा विवाद छिड़ गया है। दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बिहार की नीतीश कुमार-भाजपा गठबन्धन सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने उद्योगपति गौतम अडाणी के समूह को पावर प्लांट निर्माण के लिए भागलपुर में 1,050 एकड़ ज़मीन मात्र एक रुपए प्रति साल की दर पर 33 साल के लिए लीज़ पर दे दी है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह किसानों तथा बेरोज़गार युवाओं के साथ बड़ा विश्वासघात है। पार्टी प्रवक्ताओं ने पूछा कि जब राज्य में कृषि संकट और पलायन जैसी गंभीर समस्याएं हैं, तो सरकार ने इतनी ज़मीन अडाणी समूह को क्यों सौंप दी?
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ज़मीन अडाणी को पावर प्लांट निर्माण के लिए दी गई है। विपक्ष का आरोप है कि यह 2400 मेगावॉट का प्रोजेक्ट 21,400 करोड़ का है व इसकी घोषणा बजट में भी हुई थी पर बाद में सरकार इससे पीछे हट गई और इसे अडाणी समूह को दे दिया गया। यह सौदा पारदर्शिता और नीलामी प्रक्रिया के बिना किया गया है, जबकि छोटे निवेशक और स्थानीय उद्योग ज़मीन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
कांग्रेस ने इसे ‘घोटाले जैसी रियायत’ बताते हुए विधानसभा और सड़कों पर विरोध का ऐलान किया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर यह सौदा वापस नहीं लिया गया तो राज्यभर में आंदोलन होगा।
इस मामले में फिलहाल सरकार की और से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। परन्तु भाजपा और जदयू नेताओं ने आरोपों को राजनीतिक बताते हुए कहा है कि यह निवेश राज्य में विकास और रोज़गार लाने के लिए है।