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22 सितंबर से दवाइयाँ और मेडिकल उपकरण होंगे सस्ते!– जानिए कितनी होगी आपकी जेब में बचत

सरकार ने घटाया GST, अब इलाज पर घटेगा बोझ – लाइफ सेविंग मेडिसिन्स तक पर मिलेगी राहत

 

क्या बदलने जा रहा है 22 सितंबर से?

22 सितंबर से देश में दवाइयों और मेडिकल उपकरणों पर नए GST रेट्स लागू होंगे। यह बदलाव आम आदमी के इलाज के खर्च को सीधे प्रभावित करेगा। पहले जिन दवाइयों और उपकरणों पर 12% या 18% तक GST देना पड़ता था, अब वही टैक्स घटकर सिर्फ 5% रह जाएगा। ये लोगों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 33 “जीवन रक्षक दवाइयाँ” को तो पूरी तरह से GST-मुक्त कर दिया है। कई डायग्नोस्टिक किट, सर्जिकल आइटम, और रोजमर्रा के मेडिकल उपयोग की चीजें भी अब काफी सस्ती मिलेंगी। यह कदम इसलिए भी खास है क्योंकि भारत में इलाज पर जेब से खर्च बहुत अधिक है, और गरीब व मध्यम वर्ग को इसका सबसे ज़्यादा असर झेलना पड़ता है।

कौन-कौन सी दवाइयाँ होंगी सस्ती?

ज़्यादातर जनरल मेडिसिन्स पर GST 12% से घटकर 5% रह जाएगा। कैंसर और रेयर डिजीज़ से जुड़ी कई महंगी दवाइयाँ अब शून्य GST पर उपलब्ध होंगी।

डायबिटीज़, हार्ट डिजीज़ और हाइपरटेंशन जैसी क्रोनिक कंडीशंस में इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं की कीमतों में भी गिरावट आएगी।

मान लीजिए – अगर कोई दवा पहले ₹1,000 की आती थी (जिसमें 12% GST यानी ₹120 शामिल था), तो अब उस पर केवल ₹50 टैक्स लगेगा। यानी आपकी कुल बचत होगी ₹70 प्रति पैक।

22 सितंबर से

मेडिकल उपकरणों पर बड़ी राहत

CT स्कैन, MRI, इम्प्लांट्स जैसे high-risk medical devices पर भी अब टैक्स घटकर 5% होगा।

Diagnostic kits, glucometer, spectacles, contact lenses, bandages, gauze जैसे रोज़ाना उपयोग वाले उपकरण और आपूर्ति सस्ते हो जाएँगे।

पहले जहां इन पर 18% तक GST देना पड़ता था, अब वही टैक्स सिर्फ 5% रह गया है।

उदाहरण के तौर पर – एक glucometer जिसकी MRP ₹1,800 थी (18% GST = ₹270), अब उस पर सिर्फ ₹90 GST लगेगा। यानी आपकी बचत होगी ₹180 प्रति पीस।

कितनी सस्ती होंगी दवाइयाँ और उपकरण?

अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से अनुमान इस प्रकार है:

12% से 5% GST कटौती → 5–7% सस्ती दवाइयाँ।

18% से 5% GST कटौती → लगभग 12–13% सस्ते मेडिकल उपकरण।

Nil GST (0%) → लाइफ सेविंग दवाइयों पर भारी राहत।

सरकार और नियामकों का क्या कहना है?

एनपीपीए (राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण) ने सभी कंपनियों को निर्देश दिया है कि नई टैक्स दरों के हिसाब से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MRP) तुरंत कम करें।

सीडीएससीओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) ने कंपनियों को 3 महीने की छूट दी है कि वे पुराने स्टॉक पर नए रेट वाले स्टिकर लगाएँ।

अगर कोई कंपनी कीमतें नहीं घटाती, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

22 सितंबर से

चुनौतियाँ भी कम नहीं

कच्चे माल पर टैक्स ज़्यादा: मेडिकल डिवाइस बनाने में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स पर अभी भी 12–18% GST है। इससे मैन्युफैक्चरर्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना होगा।

पुराना स्टॉक: दुकानदारों और कंपनियों के पास पहले से प्रिंटेड MRP वाला स्टॉक है। उसमें बदलाव लाने में थोड़ा वक्त लगेगा।

आम जनता को क्या फायदा होगा?

इलाज सस्ता होगा: अस्पताल और लैब टेस्ट्स की लागत कम होगी।

क्रोनिक पेशेंट्स को राहत: डायबिटीज़/हार्ट जैसी बीमारियों में लंबे समय तक होने वाला खर्च घटेगा।

जीवन रक्षक दवाइयाँ आसान पहुँच में: कैंसर और रेयर डिज़ीज़ वाले मरीजों को सीधा फायदा।

चश्मा और लेंस जैसे रोज़ाना के उपकरण भी सस्ते होंगे।

22 सितंबर से लागू यह GST कटौती सिर्फ टैक्स का खेल नहीं है, बल्कि आम जनता की जेब में राहत है। चाहे वह ग्लूकोमीटर हो, ब्लड प्रेशर मशीन, बैंडेज या फिर कैंसर की महंगी दवाइयाँ — सबकी कीमत में गिरावट दिखेगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि कंपनियाँ और रिटेलर्स कितनी तेजी से इस राहत को मरीजों और ग्राहकों तक पहुँचाते हैं।

 

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