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कैबिनेट में बैठे लोग बैल बुद्धि के, राहुल गांधी को बालक बुद्धि कहा तो भड़की काँग्रेस

हरदीप पुरी ने राहुल गांधी को बताया था  ‘बालक बुद्धि’, जवाब में खेड़ा बोले—कैबिनेट में बैठे हैं ‘बैल बुद्धि’ लोग पढ़िए पूरी खबर 

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ‘बालक बुद्धि’ बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तीखा जवाब दिया। खेड़ा ने कहा कि कैबिनेट में ‘बैल बुद्धि’ लोग बैठे हैं। जानिए दोनों के बयान और राजनीतिक प्रतिक्रिया।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। पवन खेड़ा ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ‘बालक बुद्धि’ वाले बयान के जवाब में कहा कि  कैबिनेट में ‘बैल बुद्धि’ लोग बैठे हुए हैं समाचार एजेंसी एएनआई  से बातचीत करते हुए पवन खेड़ा ने बताया कैबिनेट में ‘बैल  बुद्धि ‘लोग बैठे हुए है। उन्हें जो कहना है कहने दीजिए मुस्कुराइए और आगे बढ़िए। आप उन्हें क्यों गंभीरतापूर्वक लेते हैं ।

 क्या था पुरी  का बयान

इससे पहले केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर टिप्पणी की थी। पुरी ने उपराष्ट्रपति चुनाव में सीपी  राधाकृष्णन की जीत के बाद कहा था  कि बीजेपी और इलेक्शन कमीशन पर विपक्षी नेताओं द्वारा वोट चोरी के आरोप लगाए गए लेकिन हमने देखा कि  उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को कैसे इतने  कम वोट मिले यह लोग अफवाह फैलाने में माहिर है झूठ   की राजनीति करते हैं

पुरी ने बात आगे बढ़ते हुए कहा था कि यह लोग यह भी नहीं बता पा रहे हैं कि उनके सांसदों में से लगभग 35 सांसदों ने उनके खुद की उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को वोट क्यों नहीं किया इसी टिप्पणी के दौरान पुरी ने राहुल गांधी का जिक्र किए बिना उन्हें बालक बुद्धि वाला बताया था पुरी ने एक पर पोस्ट में लिखा था।

क्या था पुरी का पोस्ट

यह देखकर दुख होता है कि कुछ नेता हमारी मज़बूत लोकतांत्रिक व्यवस्था को बदनाम करने की अजीब आदत से ग्रस्त है   “बालक बुद्धि” का गहरा असर वाले  ये लोग तर्क और सच से दूर होकर केवल झूठ फैलाने और चुनावी प्रणाली पर शक जताने में लगे रहते हैं।

कभी ये बैलेट  से  चुनाव की मांग करते हैं, और जब उसी पर चुनाव हार जाते हैं, तो यह नहीं बता पाते कि उपराष्ट्रपति चुनाव में  बैलेट के बावजूद इनके लगभग 35 सांसदों ने NDA उम्मीदवार को वोट कैसे दे दिया। इनकी राजनीति का तरीका साफ है — “आरोप लगाओ और भाग जाओ।” इनके आरोप अक्सर बिना सबूत और झूठे आँकड़ों पर आधारित होते हैं, जो पहली ही जाँच में ध्वस्त हो जाते हैं।

रणनीति भी तय है — अपनी नाकामी और पुराने भ्रष्टाचार-घोटालों की वजह से चुनाव हारना, फिर हार का कोई काल्पनिक कारण गढ़ना, चुनाव आयोग से शिकायत करने से बचना, सबूत और शपथ-पत्र देने से इनकार करना और आखिर में झूठे आँकड़ों के सहारे माहौल बिगाड़ने की कोशिश करना।

विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए

असलियत यह है कि “वोट चोरी” का यह शोर सिर्फ़ उनकी वोट बैंक राजनीति का हिस्सा है। इसका असली मकसद है घुसपैठियों को ताक़त देना, असली भारतीय मतदाताओं का हक़ छीनना और देश की सुरक्षा को खतरे में डालना।

 

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