महाराष्ट्र पब्लिक सेफ़्टी ऐक्ट के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध आज, विपक्षी महागठबंधन कर रहा है अगुआई
महाराष्ट्र में प्रस्तावित जन सुरक्षा बिल को लेकर आज राज्यभर में विरोध तेज़ हो गया है। विपक्षी दल महा विकास अघाड़ी (MVA) और कई मानव अधिकार संगठनों ने महाराष्ट्र के नए सुरक्षा बिल के विरोध में आज राज्यव्यापी प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
द हिंदू की एक खबर के अनुसार, महाराष्ट्र में नया सुरक्षा बिल फिलहाल तीखी सार्वजनिक बहस का केंद्र बना हुआ है और विरोध के स्वर आज राज्यभर में तेज़ दिखाई दे रहे हैं। विभिन्न नागरिक संगठनों, छात्र समूहों और विपक्षी दलों ने बिल को ‘नागरिक स्वतंत्रता के लिए जोखिम’ बताया और उसके खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन करने का आह्वान किया है।
रिपोर्ट के अनुसार में ये संगठन प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, पुणे, नागपुर और औरंगाबाद में रैलियां, सड़क जाम और संवाद कार्यक्रम आयोजित करेंगे । आयोजकों ने कहा है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेंगे, प्रशासन ने व्यवस्था के मद्देनजर सुरक्षा बलों और ट्रैफिक प्रबंधकों को अलर्ट रहने का निर्देश दे दिया है।
क्यों हो रहा है बिल का विरोध ?
विरोध इस बात पर है कि बिल कौन-सी शक्तियाँ राज्य सरकार/पुलिस को दे रहा है और क्या इन शक्तियों का इस्तेमाल नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर असर डाल सकता है?
बिल के समर्थन में सरकार का तर्क
बिल के समर्थन में सरकार का तर्क है कि यह बिल सार्वजनिक सुरक्षा और कुशल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
विरोधियों का क्या कहना है
विरोधियों का कहना है कि इस बिल को पर्याप्त पारदर्शिता और नागरिक सुरक्षा गारंटी का अभाव है जोकि अस्वीकार्य है।
कानूनी विश्लेषकों का क्या कहना है
कानूनी विश्लेषकों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे बिलों में अक्सर व्यापक परिभाषाएं और विस्तार अधिक होता है, जिन पर विशेषज्ञों की सटीक समीक्षा और संवैधानिक जांच जरूरी होती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि विपक्षी दलों ने इस बिल को लेकर अदालत के दरवाज़े पर जाने की भी बात कही है।
प्रशासन का आश्वासन
प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और कानून के दायरे में रहने का आश्वासन देते हुए कहा है कि प्रदर्शन करने वालों वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी तरह के हिंसक प्रकरणों की रोकथाम की जाएगी। स्थानीय पुलिस ने कहा है कि यदि प्रदर्शन-आह्वान शांतिपूर्ण तरीके से नहीं होंगे तो उन्हें नियंत्रित किया जाएगा; साथ ही प्रदर्शन-निर्देशों का पालन जरूरी बताया गया है।
बिल किन-किन शक्तियों का प्रावधान करता है?
स्थानीय प्रशासन और पुलिस को अस्थायी प्रतिबंध लगाने की शक्ति (जैसे किसी क्षेत्र में सभा/आंदोलन पर रोक)।
संदिग्ध व्यक्तियों या समूहों पर नज़र रखने और जुर्माना/दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार।
आपात-स्थिति में तेज़ हस्तक्षेप के लिए प्रशासनिक आदेशों को कानूनी संरक्षण।
जहां सरकार इस बिल को सार्वजनिक सुरक्षा का साधन बता रही है, वहीं मानव अधिकार समूह और विपक्ष इसे संवैधानिक और नागरिक अधिकारों के लिए जोखिम मान रहे हैं।