नेपाल में सोशल मीडिया बैन और हिंसक प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में विरोध जारी, सरकार संकट में।
सोशल मीडिया बैन के विरोध में भड़के प्रदर्शनकारी संसद भवन तक पहुंच गए, हिंसा में 19 लोगों की मौत और 300 से अधिक घायल।
नई दिल्ली डेस्क: हिमांशु पवार/ वेदान्त / सत्यम राज मेहरा : नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुका है। सोमवार से लगातार हो रही झड़पों में अब तक 19 लोग मारे जा चुके हैं और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव ने हालात और बिगाड़ दिए। इसी बीच प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया, जिससे नेपाल की राजनीति में नया संकट खड़ा हो गया है।
राजधानी और अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन
ओली के इस्तीफे की मांग को लेकर मंगलवार को काठमांडू समेत नेपाल के कई बड़े शहरों में प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी संसद भवन में घुस गए और आगजनी की घटनाएँ हुईं। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड, शेर बहादुर देउबा, गृहमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले रमेश लेखक और संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के घरों में भी आगजनी की।
सरकार में इस्तीफों का सिलसिला
हिंसा और विरोध प्रदर्शन के दबाव में अब तक 4 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। इनमें शामिल हैं:
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गृह मंत्री रमेश लेखक
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कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी
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स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल
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जल आपूर्ति मंत्री प्रदीप यादव
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लगातार इस्तीफों और विरोध प्रदर्शन के चलते सरकार की स्थिरता पर गंभीर संकट बन गया है।
सोशल मीडिया बैन, विरोध का कारण
नेपाल सरकार ने 4 सितंबर को एक्स (पूर्व ट्विटर), यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत कुल 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया था। सरकार का कहना था कि ये प्लेटफॉर्म नेपाल में पंजीकृत नहीं हैं और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
युवाओं का आरोप है कि सरकार ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए यह बैन लगाया। हजारों लोग इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपनी कला और कौशल दिखाकर रोज़गार के अवसर बना रहे थे। सोशल मीडिया पर इस बैन के कारण युवाओं में गुस्सा फैल गया, जो धीरे-धीरे हिंसक प्रदर्शन में बदल गया।
हिंसा के हालात
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में प्रदर्शनकारी आगजनी और तोड़फोड़ कर रहे हैं। कई इलाके में सड़कें जाम हो गई हैं और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। राजधानी काठमांडू में हालात तनावपूर्ण हैं, जबकि अन्य शहरों में भी हिंसा फैल रही है।
सरकार पर बढ़ता दबाव
सोशल मीडिया बैन हटाने और पीएम ओली के इस्तीफे के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि देश में लगातार हिंसा और युवाओं का गुस्सा नेपाल सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
देश में भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया पर बैन और युवा विरोध प्रदर्शन ने सरकार की साख को गहरा झटका दिया है। अब राजनीतिक माहौल अस्थिर हो गया है और विपक्षी दल सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं।