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लालबाग के राजा का रथ हिंदुस्तानी मस्जिद के सामने क्यों रुकता है? जानें इस अनोखी परंपरा की कहानी

लालबाग के राजा का रथ हिंदुस्तानी मस्जिद के सामने क्यों रुकता है? जानें इस अनोखी परंपरा की कहानी

मुंबई गणेशोत्सव की सबसे प्रसिद्ध परंपरा—लालबाग के राजा का रथ हर साल भायखला की 125 साल पुरानी हिंदुस्तानी मस्जिद के सामने रुकता है। जानें कब और क्यों शुरू हुई यह हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल।

मुंबई: गणेशोत्सव का अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी भावनाओं और आस्था का संगम लेकर आता है l

इस बीच लाखों की संख्या में गणेश भक्त सड़कों पर गणेश मंडलों की भव्य शोभायात्राओं में शामिल होते हैंl इनमें सबसे चर्चित शोभायात्रा लालबाग के राजा की है l
यह शोभायात्रा देखने के लिए जगह-जगह से दर्शक आते हैं l
यह शोभायात्रा गिरगांव चौपाटी तक जाती है और विसर्जन से पहले सबका ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं l दशकों से चली आ रही ये परंपरा हिंदू–मुस्लिम एकता और भाईचारे की मिसाल हैl

यह मुंबई का एकमात्र ऐसा गणपति जुलूस है जो किसी मस्जिद के सामने रुकता है l लालबाग के राजा का जुलूस जब भायखला इलाके से गुजरता है तो वहां स्थित 125 साल पुरानी चिश्ती हिंदुस्तानी मस्जिद के सामने रथ कुछ देर के लिए रुकता हैl यह मुंबई का ही नहीं देश का एकमात्र ऐसा गणपति जुलूस है जो मस्जिद के सामने रुकता है l मुस्लिम समुदाय के लोग गणपति बप्पा का स्वागत मिठाई और फूलों से करते हैं l इस दौरान दोनों समुदाय के लोग मिलकर खुशियां बांटते हैं और एक दूसरे का सत्कार करते हैं l

कब से शुरू हुई परंपरा

सूत्रों के मुताबिक और इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा 1975 से शुरू हुई थी l तब से हर साल लालबाग के राजा का रथ इस मस्जिद के सामने रुकता है और यह परंपरा निरंतर जारी हैl
यह सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि सामाजिक सद्भाव का भी प्रतीक है l

नमाज के समय ठहर जाती है लालबाग के राजा की शोभायात्रा

गणपति बप्पा की यह मूर्ति “नवसाचा गणपति’ के नाम से प्रसिद्ध है क्योंकि यहां आकर लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैंl इस गणेशोत्सव परंपरा की सबसे सुंदर बात यह है कि यदि लालबाग के राजा का रथ मस्जिद के सामने नमाज के समय पहुंचता है तो गणपति मंडल अपना जुलूस रोककर नमाज पूरी होने का इंतजार करता है l नमाज खत्म होते ही दोनों समुदाय मिलकर गणपति बप्पा का स्वागत करते हैं और फिर शोभायात्रा आगे बढ़ती हैl यह दृश्य न केवल मुंबई बल्कि पूरे भारत में धार्मिक एकता का मिसाल पेश करता है lहिंदुस्तानी मस्जिद के सामने क्यों रुकता है लालबाग के राजा का रथ

मुंबई: गणेशोत्सव का अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी भावनाओं और आस्था का संगम लेकर आता है l

इस बीच लाखों की संख्या में गणेश भक्त सड़कों पर गणेश मंडलों की भव्य शोभायात्राओं में शामिल होते हैंl इनमें सबसे चर्चित शोभायात्रा लालबाग के राजा की है lयह शोभायात्रा देखने के लिए जगह-जगह से दर्शक आते हैं l

यह शोभायात्रा गिरगांव चौपाटी तक जाती है और विसर्जन से पहले सबका ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं l दशकों से चली आ रही ये परंपरा हिंदू–मुस्लिम एकता और भाईचारे की मिसाल हैl

यह मुंबई का एकमात्र ऐसा गणपति जुलूस है जो किसी मस्जिद के सामने रुकता है l लालबाग के राजा का जुलूस जब भायखला इलाके से गुजरता है तो वहां स्थित 125 साल पुरानी चिश्ती हिंदुस्तानी मस्जिद के सामने रथ कुछ देर के लिए रुकता हैl यह मुंबई का ही नहीं देश का एकमात्र ऐसा गणपति जुलूस है जो मस्जिद के सामने रुकता है l मुस्लिम समुदाय के लोग गणपति बप्पा का स्वागत मिठाई और फूलों से करते हैं l इस दौरान दोनों समुदाय के लोग मिलकर खुशियां बांटते हैं और एक दूसरे का सत्कार करते हैं l

1975 से चली आ रही यह अनूठी परंपरा आज भी पेश करती है हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल

सूत्रों के मुताबिक और इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा 1975 से शुरू हुई थी l तब से हर साल लालबाग के राजा का रथ इस मस्जिद के सामने रुकता है और यह परंपरा निरंतर जारी हैl

यह सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि सामाजिक सद्भाव का भी प्रतीक है l

नमाज के समय ठहर जाती है लालबाग के राजा की शोभायात्रा

गणपति बप्पा की यह मूर्ति “नवसाचा गणपति’ के नाम से प्रसिद्ध है क्योंकि यहां आकर लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैंl इस गणेशोत्सव परंपरा की सबसे सुंदर बात यह है कि यदि लालबाग के राजा का रथ मस्जिद के सामने नमाज के समय पहुंचता है तो गणपति मंडल अपना जुलूस रोककर नमाज पूरी होने का इंतजार करता है l नमाज खत्म होते ही दोनों समुदाय मिलकर गणपति बप्पा का स्वागत करते हैं और फिर शोभायात्रा आगे बढ़ती हैl यह दृश्य न केवल मुंबई बल्कि पूरे भारत में धार्मिक एकता का मिसाल पेश करता है l

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