राजद के पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव ने नारदीगंज जनसभा में तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव की तुलना “जर्सी गाय” से की। राजद नेताओं ने इसे महिला का अपमान बताया और विरोध प्रदर्शन किया। जानें पूरे मामले की डिटेल्स।
सत्यम राज मेहरा , पटना : बिहार की राजनीति में रविवार को नया बवाल खड़ा हो गया। राजद के पूर्व विधायक और मंत्री राजबल्लभ यादव ने नारदीगंज में आयोजित एक जनसभा में तेजस्वी यादव की पत्नी, राजश्री यादव, पर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने राजश्री की तुलना “जर्सी गाय” से की।

राजद नेताओं ने इसे महिला का अपमान और पार्टी नेतृत्व की गरिमा पर हमला बताया। नवादा में राजद महिला प्रकोष्ठ ने विरोध प्रदर्शन करते हुए यादव का पुतला दहन किया। वहीं नवादा महिला प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष रेणु सिंह ने कहा, “यह टिप्पणी निंदनीय है। महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी बात को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

हाल ही में वोटर अधिकार यात्रा के दौरान दरभंगा में राजद और कांग्रेस के मंच से कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माँ को गाली दिए जाने का आरोप लगा, जिसके बाद एनडीए ने 4 सितंबर को बिहार बंद बुलाया था। जिससे राज्य की राजनीति गरमा गई थी , अब ऐसे में राजबल्लभ यादव का यह बयान आग में घी डालने के बराबर है
बीजेपी में जाने की चर्चाएँ
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि राजबल्लभ यादव अब बीजेपी में शामिल होने की संभावना तलाश रहे हैं। यह बात तब सुर्खियों में आई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिमरिया ब्रिज का उद्घाटन करने बिहार पहुंचे। इस दौरान मोदी के मंच पर राजबल्लभ यादव की पत्नी, आरजेडी विधायक विभा देवी, और राजद विधायक प्रकाश वीर को देखा गया।
राजबल्लभ यादव और विवादों का पुराना नाता
राजबल्लभ यादव कभी राजद के कद्दावर नेता माने जाते थे। वे नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। लेकिन उनका राजनीतिक सफर 2016 में तब पटरी से उतर गया जब उन पर नालंदा की एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा। दरअसल 6 फरवरी 2016 को लगभग 16 वर्षीय लड़की को कपड़े और पैसे दिलाने का झांसा देकर यादव के घर ले जाया गया, और उसके साथ दुष्कर्म हुआ। पीड़िता ने 9 फरवरी को मामला दर्ज कराया। पुलिस ने आईपीसी की धारा 376 और POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया। यादव कुछ समय तक फरार रहे, लेकिन बाद में गिरफ्तार हुए। लंबी सुनवाई के बाद 15 दिसंबर 2018 को पटना की विशेष POCSO अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और 21 दिसंबर को उन्हें आजीवन कारावास तथा ₹50,000 जुर्माने की सजा सुनाई। इसी फैसले के साथ उनकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई।

पत्नी विभा देवी को मिला टिकट, बनी विधायक
सजा के बाद राजद ने उनकी पत्नी, विभा देवी, को टिकट दिया और वे विधायक बनीं। इस दौरान यादव लगातार चर्चा और विवादों में बने रहे। गवाही के दौरान पीड़िता और उसके परिवार पर दबाव और धमकियों का सामना करने की बातें भी सामने आईं। इसके बावजूद पीड़िता ने केस वापस लेने से इनकार किया और अदालत ने सबूतों के आधार पर यादव को दोषी ठहराया।
हाईकोर्ट से मिली राहत, जेल से बाहर
करीब नौ साल बाद, 14 अगस्त 2025 को पटना हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी और अभियोजन पक्ष की कमजोरियों का हवाला देकर राजबल्लभ यादव को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद उनकी राजनीतिक वापसी की उम्मीदें बढ़ीं, लेकिन अब तेजस्वी यादव की पत्नी पर विवादित बयान ने उन्हें फिर से मुश्किल में डाल दिया है।