जापान के प्रधानमंत्री इशिबा शिगेरु अपने पद से इस्तीफा देने वाले हैं। उन्होंने जुलाई में हुए संसदीय चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेने के लिए पार्टी की ओर से बढ़ती मांग के बाद रविवार को पद छोड़ने की मंशा जाहिर की है।
इशिबा ने पिछले साल अक्टूबर में जापान के प्रधानमंत्री का पदभार संभाला था। पद संभालने के वक्त उन्होंने मंहगाई से निपटने, पार्टी में सुधार और कई बड़े वादे किए थे। हालांकि सत्ता में आने के बाद उनको लगातार कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। एलडीपी पर राजनीतिक धन उगाही घोटालों के आरोप ने उनकी मुश्किल को बढ़ाया।
हार के बाद भी पद पर बने रहे
इशिबा चुनाव में हार के बावजूद अमेरिकी टैरिफ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पद पर बने रहे। इशिबा को जापान के चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था। 20 जुलाई को हुए मतदान में इशिबा की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और उसके सहयोगी गठबंधन कोमेइतो को 248 सीटों वाले उच्च सदन में बहुमत नहीं मिला था। वह बहुमत से तीन सीटें दूर रह गए थे। ऐसे में गठबंधन संसद के दोनों सदनों में अल्पमत में आ गया।
उच्च सदन में मतदान ऐसे समय में हुआ था, जब इशिबा के गठबंधन ने पिछले साल अक्तूबर में हुए निचले सदन के चुनाव में बहुमत खो दिया था। तब से उनकी अलोकप्रिय सरकार को संसद में विधेयक पारित कराने के लिए विपक्ष के आगे झुकना पड़ रहा था। यह सरकार अब तक जापान के पारंपरिक मुख्य खाद्यान्न चावल सहित बढ़ती कीमतों और घटती मजदूरी को रोकने के लिए तुरंत प्रभावी उपाय करने में नाकाम रही है।
राजनीतिक परिवार से आते हैं इशिबा
68 साल के शिगेरु इशिबा एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं। वह साल 1986 से प्रतिनिधि सभा के सदस्य हैं। वह साल 2007 से 2008 तक रक्षा मंत्री, 2008 से 2009 तक कृषि और मत्स्य पालन मंत्री रहे हैं। वह साल 2012 से 2014 तक LDP के महासचिव रहे हैं।
इशिबा के पिता 1958 से 1974 तक तोतोरी प्रान्त के गवर्नर और जापान के गृह मंत्री रहे थे। अपनी पिता की मौत के बाद राजनीति में आने वाले इशिबा 1986 में 29 वर्ष की उम्प में एलडीपी से प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए। साल 2024 में वह पीएम पद तक पहुंच गए।