बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनावों से पहले सीट बंटवारे को लेकर हलचल तेज़ हो गई है। NDA के दो बड़े दल—भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) अपने हिस्से की सीटों पर बातचीत कर रहे हैं। इन चर्चाओं के बीच अब JD(U) ने एक अहम मांग रखी है। पार्टी चाहती है कि उसे BJP से कम से कम एक सीट अधिक मिले।
क्यों रखी गई यह मांग
JD(U) के नेताओं का कहना है कि यह मांग सिर्फ सीटों की गिनती के लिए नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक प्रतीकात्मकता से जुड़ा है। नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की राजनीति का चेहरा रहे हैं। ऐसे में पार्टी चाहती है कि सीटों की संख्या से यह संदेश जाए कि गठबंधन में JD(U) का वज़न BJP के बराबर नहीं बल्कि उससे थोड़ा अधिक है।
शुरुआती चर्चा और स्थिति
गठबंधन के अंदर की बातचीत में पहले यह माना जा रहा था कि BJP और JD(U) लगभग बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। अनुमान था कि दोनों को लगभग 100 से 105 सीटें मिल सकती हैं। लेकिन JD(U) ने अब साफ कर दिया है कि उसे बराबरी नहीं, बल्कि बीजेपी से एक सीट अधिक चाहिए। यही शर्त पार्टी ने आगे बढ़ाई है।
दिल्ली में होगी अहम बैठक
बताया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में NDA के बड़े नेताओं की बैठक दिल्ली में होगी। इस दौरान सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। भाजपा और जदयू दोनों दलों के सांसद, विधायक और नेता इस दौरान मौजूद होंगे। यह बैठक उपराष्ट्रपति चुनाव और प्रशिक्षण शिविर के कार्यक्रमों के साथ जुड़ी हुई है।

LJP (रामविलास) की मांग
सीट बंटवारे की बातचीत में सिर्फ BJP और JD(U) ही नहीं, बल्कि चिराग पासवान की पार्टी—लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) यानी LJP (RV)—भी अहम भूमिका निभा रही है। इस पार्टी ने लगभग 40 सीटों की मांग की है। LJP (RV) का कहना है कि उसके पास पांच सांसद हैं और बिहार की राजनीति में उसकी पकड़ है।
लेकिन BJP और JD(U) इतनी बड़ी संख्या देने के पक्ष में नहीं हैं। माना जा रहा है कि LJP को 20 सीटों के आसपास समझौता करना पड़ सकता है।
राजनीतिक महत्व
JD(U) की मांग का राजनीतिक महत्व ज़्यादा है। अगर पार्टी को BJP से एक सीट अधिक मिलती है, तो इससे नीतीश कुमार की छवि गठबंधन में वरिष्ठ और निर्णायक नेता के रूप में मजबूत होगी। वहीं, बीजेपी के लिए यह चुनौती है कि वह अपने कार्यकर्ताओं को कैसे संतुष्ट करे।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल संख्या का नहीं बल्कि सम्मान और संदेश का है। बिहार के मतदाताओं तक यह संदेश पहुंचाना जरूरी है कि नीतीश कुमार अभी भी NDA के भीतर सबसे भरोसेमंद चेहरा हैं।

आगे की स्थिति
BJP और JD(U) के बीच बराबरी की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन JD(U) की नई शर्त से खींचतान बढ़ी है।
LJP (RV) की 40 सीटों की मांग से समीकरण और जटिल हो गया है।
समझौता अगले कुछ दिनों में होना तय है, क्योंकि चुनावी तैयारी का समय अब नज़दीक है।
बिहार NDA के भीतर सीट बंटवारे की जंग इस बार सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह सम्मान और नेतृत्व की छवि से जुड़ा मामला बन गया है। JD(U) ने BJP से सिर्फ एक सीट अधिक मांगकर यह संकेत दे दिया है कि गठबंधन में उसकी भूमिका साधारण नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि BJP इस मांग को मानती है या फिर दोनों दलों के बीच एक और दौर की सियासी रस्साकशी होती है।