बिहार में आखिर चुनाव से पहले हजारों संविदा कर्मियों को क्यों नौकरी से निकाल दिया गया
बिहार में हड़ताल पर गए 7000 से अधिक विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी गई है। ये कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे थ। हड़ताल ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की परेशानी बढ़ा दी थी ये कर्मचारी चेतावनियों और अंतिम अल्टीमेटम देने के बाद भी ड्यूटी पर वापस नहीं आए थेl इसलिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए उन कर्मियों की सेवा समाप्त करने का ऐलान किया है

आपको बता दें कि बिहार में 12500 से अधिक विशेष सर्वेक्षण कर्मी हड़ताल पर चले गए थे जिससे विभाग का कामकाज ठप हो गया था निर्देशों और बार-बार अपील के बावजूद केवल 3295 कर्मी ही काम पर वापस लौटे l राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव “दीपक कुमार सिंह” ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके जानकारी दी है कि बचे हुए बाकी सेवा कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी गई है।
क्या चाहते हैं संविदा कर्मी
हड़ताल पर गए सेवा कर्मी नियमित सेवा की मांग कर रहे हैं उनका कहना था कि संविदा पर ड्यूटी करने के बावजूद उनसे परमानेंट कर्मचारियों जितना ही काम लिया जा रहा है l 16 अगस्त से चल रही हड़ताल के बाद चेतावनी,अंतिम अल्टीमेटम और अपील की बावजूद अधिकांश कर्मी काम पर नहीं लौटे जिसकी वजह से बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की मुश्किलें लगातार बढ़ती गई काम ठप पड़ गया l जिसके बाद बिहार सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए हड़ताल पर बैठे संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी हैl
| पहलू | महत्वपूर्ण बातें (ह्यूमन टोन में) |
|---|---|
| कितने कर्मियों की नौकरी गई | 7,000 से ज्यादा संविदा कर्मियों की सेवाएँ अचानक समाप्त कर दी गईं — हज़ारों परिवारों पर सीधा असर। |
| कुल हड़ताल पर कर्मी | करीब 12,500 कर्मचारी लंबे समय से हड़ताल पर थे, विभाग का कामकाज लगभग ठप हो गया। |
| कितने लौटे काम पर | सिर्फ 3,295 लोग ड्यूटी पर लौटे; बहुसंख्यक कर्मचारी डटे रहे। |
| सरकार की कार्रवाई क्यों | बार-बार चेतावनी और अंतिम अल्टीमेटम के बाद भी सेवा सामान्य नहीं हुई, इसी वजह से कड़ा कदम उठाया गया। |
| कर्मियों की मांग | “जब काम परमानेंट स्टाफ जितना कराया जा रहा है, तो नियमितीकरण क्यों नहीं?” — यही केंद्र में रही मांग। |
| सरकार का पक्ष | विभाग का कहना है—“सार्वजनिक काम प्रभावित हो रहा था; मजबूरी में निर्णय लेना पड़ा।” |
| तुरंत असर | चुनाव से पहले रोजगार पर अनिश्चितता, और प्रशासन के लिए नई चुनौती। हाई-इम्पैक्ट |
| समयरेखा | हड़ताल 16 अगस्त से जारी थी; बीच में कई दौर की अपीलें और चेतावनियाँ दी गईं। |
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