
मुंबई: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर गहमागहमी का दौर जारी है। महाराष्ट्र सरकार ने मनोज ज़रांगे पाटिल की छह मांगों को स्वीकार कर लिया है। राज्य सरकार ने एक सरकारी आदेश जारी किया जिसमें मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी सर्टिफिकेट देने की बात कही गई है। इसके बाद महाराष्ट सरकार में मंत्री और ओबीसी नेता छगन भुजबल ने कड़ा रुख अपनाया है। भुजबल ने बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उनका यह फैसला सरकार के फैसले प्रति उनकी नाराजगी जताने वाला था। भुजबल इस सरकारी प्रस्ताव के विरोध में अदालत जाने की तैयारी कर रहे है। भुजबल के इस कदम से महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आ सकता है।

घटना पर बोलते हुए शिवसेना (युबीटी ) नेता संजय राउत ने कहा यदि छगन भुजबल इस बात को स्वीकार करते हैं कि ओबीसी के साथ न्याय नहीं हुआ है फिर भी वह मुख्यमंत्री के साथ काम कर रहे हैं और अगर भुजबल अपने समुदाय के प्रति ईमानदार है तो उन्हें कैबिनेट से अलग हो जाना चाहिए। दूसरी ओर बीजेपी के एमएलसी परिणय फुके ने कहा कि मराठा आरक्षण पर फैसला कैबिनेट की सहमति से लिया गया है और ओबीसी कोटे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
लंबे समय से चल रहे मराठा आरक्षण आंदोलन को आखिरकार बुधवार को सरकार द्वारा मांगे मान लिए जाने पर खत्म कर दिया गया। आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने अनशन तोड़ते हुए कहा कि मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के मराठा समुदाय को अब आरक्षण मिलेगा। उन्होंने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और सरकार के फैसले पर भरोसा करने की अपील की।
सरकार का आश्वासन और आदेश
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने आंदोलन समाप्त होने के बाद कहा— “मैं मनोज जरांगे पाटिल और मराठा समाज के सभी भाई-बहनों को धन्यवाद देता हूं। हमने सकारात्मक सोच के साथ यह निर्णय लिया ताकि किसी भी समाज के साथ अन्याय न हो। हैदराबाद गैजेटियर की मांग को लागू करने का सरकारी आदेश आज जारी कर दिया गया है। यह मराठा समाज के लिए ऐतिहासिक दिन है।” सीएम देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम अजित पवार भी इस निर्णय में शामिल रहे।
हाई कोर्ट की टिप्पणी
बॉम्बे हाई कोर्ट में भी इस मामले पर सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। जरांगे के वकील सतीश मानशिंदे ने कोर्ट को बताया कि आंदोलनकारियों पर पुलिस ने केस दर्ज किए हैं। इस पर कोर्ट ने हलफनामा मांगा और पूछा कि किन गलतफहमियों के चलते आंदोलन इतना आगे बढ़ा। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी। महाराष्ट्र मराठा आरक्षण
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