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दिवाली पर बीमा ग्राहकों को मिल सकता है बड़ा तोहफा, जीएसटी में कटौती पर विचार

 

नई दिल्ली : केंद्र सरकार दिवाली के आसपास बीमा क्षेत्र से जुड़े जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) ढांचे में बड़े सुधार की घोषणा कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, चर्चा इस बात पर चल रही है कि बीमा पॉलिसियों पर लगने वाला 18% जीएसटी या तो पूरी तरह खत्म किया जाए या फिर इसे घटाकर  5% तक कर दिया जाए। यदि ऐसा हुआ तो बीमा खरीदना पहले की तुलना में काफी सस्ता होगा और लाखों लोगों को वित्तीय सुरक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी। वैश्विक बाजार में उथल-पुथल और ट्रंप की टैरिफ के बाद भारत सरकार भारत में खपत बढ़ने पर विशेष ध्यान दे रही है जिसके लिए जीएसटी में सुधार और सरलीकरण को लेकर कई सालों से चर्चा जारी है। हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी लगाना सरकार के लिए किरकिरी बना हुआ है  हेल्थ इंश्योरेंस पर लगे जीएसटी की वजह से प्रीमियम की राशि काफी अधिक हो जाती है ।

पॉलिसीधारकों को होगी सीधी बचत

फिलहाल हेल्थ, टर्म और यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) जैसी योजनाओं पर 18% जीएसटी लगाया जाता है। इस वजह से  मिडिल क्लास और लोअर मिडल क्लास के लिए बीमा प्रीमियम और महंगा हो जाता है।  बीमा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बीमा कवरेज में  बढ़ोतरी हो सकती है।  जीएसटी में कमी आने से पहली बार बीमा खरीदने वालों की संख्या बढ़ेगी। वहीं, मौजूदा ग्राहक भी अपने बेसिक प्लान्स को अपग्रेड कर व्यापक कवरेज वाली योजनाओं का विकल्प चुन सकते हैं।

कंपनियों की चिंता: इनपुट टैक्स क्रेडिट

हालांकि, इस सुधार को लेकर बीमा कंपनियों की कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि अगर जीएसटी पूरी तरह से हटा दिया गया तो वे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं ले पाएंगी। इसका मतलब है कि परिचालन लागत बढ़ सकती है। उद्योग जगत के एक बड़े हिस्से की राय है कि बीमा पर जीएसटी को पूरी तरह खत्म करने के बजाय इसे घटाकर 5% करना अधिक व्यावहारिक समाधान होगा। इस मॉडल से ग्राहकों को भी फायदा होगा और कंपनियां भी आईटीसी का लाभ लेती रहेंगी।

सरकार को भी दीर्घकालिक लाभ

विश्लेषकों के अनुसार, शुरुआती दौर में सरकार के राजस्व पर दबाव पड़ सकता है और लगभग 17,000 करोड़ रुपये की कमी का अनुमान है। लेकिन जैसे-जैसे ज्यादा लोग बीमा पॉलिसी खरीदेंगे, प्रीमियम का वॉल्यूम बढ़ेगा और टैक्स कलेक्शन भी लंबे समय में बढ़ जाएगा। खासकर हेल्थ इंश्योरेंस और माइक्रो-इंश्योरेंस जैसे क्षेत्रों में तेजी आ सकती है, जो सीधे तौर पर आम जनता को राहत पहुंचाते हैं। अगर सरकार यह कदम उठाती है तो इसे आम नागरिकों के लिए दिवाली का बड़ा तोहफा माना जाएगा। यह सुधार न केवल परिवारों की जेब पर बोझ कम करेगा बल्कि देश में वित्तीय स्थिरता और बीमा कवरेज बढ़ाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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