बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति गरमा गई है। एक तरफ दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बीजेपी की बड़ी बैठक हो रही है, तो दूसरी ओर पटना में तेजस्वी यादव ने पार्टी विधायकों को तलब कर लिया है। चुनावी सुगबुगाहट तेज होते ही सभी दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुट गए हैं।
दिल्ली में अमित शाह की रणनीति बैठक

दिल्ली में चल रही बीजेपी बैठक में बिहार के दोनों डिप्टी सीएम — सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा — समेत प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और अन्य बड़े नेता मौजूद हैं। बैठक का सबसे अहम एजेंडा है सीट शेयरिंग। पिछली बार बीजेपी और जेडीयू के बीच सीटों का बंटवारा हुआ था, लेकिन इस बार समीकरण अलग हैं क्योंकि चिराग पासवान की पार्टी भी गठबंधन में शामिल है। माना जा रहा है कि एनडीए के भीतर तालमेल बैठाना इस बार आसान नहीं होगा।
पटना में तेजस्वी की हलचल
उधर पटना में महागठबंधन की ओर से भी बैठकों का दौर जारी है। तेजस्वी यादव ने विधायकों की बैठक बुलाई है, जिससे साफ है कि विपक्ष भी चुनाव से पहले अपने पत्ते मजबूत करना चाहता है। महागठबंधन में भी सीट बंटवारे को लेकर माथापच्ची होना तय माना जा रहा है।
जीतन राम मांझी की मांग
चुनाव से पहले हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने भी अपनी डिमांड रख दी है। मांझी ने कहा कि अगर एनडीए सच में उन्हें सम्मान और सहानुभूति देता है तो उनकी पार्टी को कम से कम 20 सीटें मिलनी चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “हमें ऐसी सीटें चाहिए जो हमारी गरिमा बनाए रखें। हमारे कार्यकर्ताओं और आम जनता की यही उम्मीद है।”
कब होंगे चुनाव?
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों पर चुनाव अक्टूबर-नवंबर में होने की संभावना है। एनडीए में बीजेपी और जेडीयू 100-100 से ज्यादा सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं सहयोगी दल चिराग पासवान और जीतन राम मांझी भी अपने हिस्से की सीटें सुरक्षित करना चाहते हैं। दूसरी तरफ महागठबंधन भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा है। बिहार का चुनावी मैदान इस बार और भी दिलचस्प होने वाला है। दिल्ली से लेकर पटना तक बैठकों और रणनीतियों का दौर इस बात की बानगी है कि सीट बंटवारे पर जमकर रस्साकशी होगी।