दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में सुनवाई करते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की पीठ ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम सहित सात अन्य मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, अथर खान, मीरान हैदर, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी हैं।

सुप्रीम कोर्ट जाएंगे आरोपी
उमर खालिद और अन्य की पैरवी कर रहे वकील ने बचाव करते हुए कहा कि वह पहले ही चार से अधिक साल कस्टडी में रह चुके हैं । वह हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन दंगों का उद्देश्य सिर्फ हिंसा नहीं था, बल्कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की साजिश भी इसमें शामिल थी। उन्होंने अदालत में कहा – “अगर कोई राष्ट्र के खिलाफ काम करेगा, तो बरी होने तक जेल में रहना ही ठीक है।”
50 से अधिक लोगों की हिंसा में हुई थी मौत
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस हिंसा में करोड़ों रुपये की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा था। बता दें कि उमर खालिद और अन्य पर दंगों की साजिश रचने का आरोप है, जिसके बाद फरवरी 2020 में दिल्ली में दंगे भड़के। दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर दिल्ली दंगों का ‘मास्टरमाइंड’ होने का आरोप लगाया था। इन सभी पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था।