मराठा आरक्षण आंदोलन: बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुंबई पुलिस ने आंदोलनकारी मनोज जरांगे को मैदान छोड़ने का नोटिस जारी किया, आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं
मुंबई, – मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर मुंबई में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे पाटील को मुंबई पुलिस ने नोटिस जारी कर मैदान खाली करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई, जिसमें कहा गया कि किसी भी सार्वजनिक स्थल पर लंबे समय तक कब्जा नहीं किया जा सकता।
क्या है पुलिस का पक्ष
पुलिस का कहना है कि आंदोलन के लिए केवल 5,000 लोगों की अनुमति दी गई थी, लेकिन मैदान और आसपास की सड़कों पर 40,000 से अधिक लोग जुट गए। आंदोलनकारियों ने मैदान और सड़कों पर खाना बनाने, स्नान करने और क्रिकेट खेलने जैसी गतिविधियां शुरू कर दी थीं, जिससे स्वच्छता और यातायात व्यवस्था चरमरा गई।
हाईकोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया कि 2 सितंबर दोपहर तक सड़कों को खाली कराया जाए। अदालत ने कहा – “मुंबई की स्थिति गंभीर हो चुकी है, लोगों का जीवन ठप हो गया है।”
हालांकि, मनोज जरांगे ने साफ कहा है कि वे अपनी मांग पूरी होने तक मैदान नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि सरकार को मराठवाड़ा के मराठों को कुन्बी (OBC) समुदाय घोषित करना होगा और स्थानीय प्रशासन को तत्काल प्रमाणपत्र जारी करना चाहिए। जरांगे ने चेतावनी दी – “अगर बल प्रयोग हुआ या गिरफ्तारी की कोशिश की गई, तो यह सरकार के लिए खतरनाक साबित होगा।”

जरांगे ने यह भी घोषणा की कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो शनिवार और रविवार को बड़ी संख्या में मराठा समाज के लोग मुंबई पहुंचेंगे, और सोमवार से आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।
वहीं कांग्रेस सांसद शाहू छत्रपति ने केंद्र और राज्य सरकार से 50% आरक्षण सीमा बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन की मांग की है। उन्होंने कहा कि मराठा समाज को न्याय दिलाने के लिए यह कदम उठाना ज़रूरी है।