7 साल बाद पीएम मोदी की चीन यात्रा, शी जिनपिंग से 50 मिनट लंबी मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को SCO ( शंघाई सहयोग संगठन) में हिस्सा लेने के लिए चीन के तियान जिन शहर में पहुंचे । इस समिट में पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई । जिसमें व्यापार, सुरक्षा सहित कई अहम मुद्दे शामिल थे। यह मीटिंग करीब 50 मिनट तक चली। बता दें पीएम मोदी 7 साल बाद चीन यात्रा पर पहुंचे हैं।

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की यह मुलाकात सुर्खियों में रही है। जिसमें दोनों देश के नेताओं ने सीमा विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने और व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया है।
बता दें कि यह मुलाकात गलवान में हुए संघर्षों के बाद दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने में अहम मानी जा रही है।
SCO समिट में पीएम ने कई मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट किया

आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद एक संवेदनशील मुद्दा है इस पर सभी देशों को साथ मिलकर लड़ना होगा। उन्होंने ने कहा आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है ।
आर्थिक सहयोग और जलवायु परिवर्तन – भारत ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा देने पर अधिक जोर देते हुए सतत विकास और ग्रीन एनर्जी पर चर्चा की
यात्रा से भारत को क्या मिलेगा
मोदी की यह चीनी यात्रा भारत के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित सकती है
सीमा स्थिरता – इस यात्रा से दोनों देशों के बीच चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने में मदद करेगी ।
व्यापार में सुधार – भारत और चीन दोनों एक दूसरे के बड़े व्यापारिक साझेदार है, लेकिन संतुलन चीन के पक्ष में ज्यादा है। समिट में हुई बातचीत से इसमें सुधार की उम्मीद नजर आ रही है ।
राजनीति विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पर भरोसा करना भारत के लिए आसान नहीं हैं। क्योंकि सीमा विवाद, पाकिस्तान को चीन का समर्थन और हिन्द महासगर में चीन की गतिविधिया भारत के लिए चिंता का सबब बनी हुई है है ।
SCO समिट का महत्व
SCO दुनिया का एक प्रमुख बहुपक्षीय संगठन होने के नाते यह सुरक्षा, आतंकवाद, क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। इसमें भारत,चीन ,रूस , पाकिस्तान और मध्यएशियाई के कई देश शामिल है। भारत 2017 से इसमें शामिल होने के बाद सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी बनाए हुए है।
SCO (शंघाई सहयोग संगठन) क्या है?
यह एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून2001 को शंघाई (चीन) में हुई थी।
संगठन को दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन माना जाता है क्योंकि इस से जुड़े सारे देशों की आबादी और भौगोलिक क्षेत्र दुनिया का बड़ा हिस्सा कवर करते है।