पुलिसकर्मी बनने के सपने से लेकर डॉक्टर बनने तक का सफर तय करने जा रहे मजदूरी करने वाले ओडिशा के 19 साल की शुभम सबर की कहानी जानिए।
बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहा करते हैं, मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है। इस कहावत को एक बार फिर ओड़िशा के शुभम सबर ने साबित करके दिखा दिया है। मजदूरी से NEET में सफलता
आखिर कौन है शुभम सबर?
शुभम सबर ओडिशा के खुर्दा जिले के रहने वाले हैं। इनके परिवार में कुल 5 लोग हैं।
शुभम के पिता साहादेब सबर गांव में ही खेती करते है। घर में आर्थिक तंगी से जूझ रहे शुभम ने अपने परिवार के लिए कुछ महीने पहले ही बेंगलुरु जा कर एककंस्ट्रक्शन साइट पर मजदूरी करना शुरू किया था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, शुभम सबर ने बताया कि “मैं बेंगलुरु में कंस्ट्रक्शन साइट पर काम कर रहा था। तभी मेरा फोन बजा। मैंने जब फोन देखा तो मेरे टीचर बासुदेब मोहरना थे। उन्होंने बोला कि मोहल्ले में मिठाई बाटों, तुमने नीट यूजी क्लियर कर लिया है। उसके फौरन बाद अपने कॉन्ट्रैक्टर के पास पहुंच कर, अगले दिन अपने घर पर जाने की बात कही।”
शुभम ने करीब तीन महीने मजदूरी कर, कुल 45,000 रुपए कमाए थे। इनमें से कुछ रुपए खर्च कर कोचिंग की फीस भरी और साथ ही 25,000 रुपए मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए बचाकर रखे हुए थे।
शुभम ने जून 2025 में नीट यूजी की परीक्षा में सफ़लता हासिल कर एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, ब्रह्मपुर में दाखिला सुनिश्चित किया।
मजदूरी से NEET में सफलता । आगे की पढ़ाई के लिए परिवार ने जताई सरकारी मदद की उम्मीद।
शुभम के माता पिता को खुशी के साथ ही आगे की पढ़ाई की चिंताएं भी सता रही है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनके बेटे के पांच साल के एमबीबीएस कोर्स को पूरा कराने में मदद करेगी।
शुभम की मां ने बताया कि शुभम पुलिसकर्मी बनना चाहता था, इसके लिए जी तोड़ मेहनत भी करता था। 10वीं में 84 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे, साथ ही 12वीं में साइंस विषय से 64 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। जिसके बाद शुभम की मेडिकल की ओर रुचि बढ़ी और उन्होंने डॉक्टर बनने का फैसला लिया। इसलिए उसने नीट की तैयारी के लिए कोचिंग का सहारा लेकर तैयारी शुरू कर दी।
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