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बिहार में बाढ़ 2025: जहानाबाद, सहरसा और मुंगेर में जलप्रलय का कहर

बिहार में बाढ़ 2025: जहानाबाद, सहरसा और मुंगेर – त्रासदी, संघर्ष और उम्मीद

बिहार:
इस साल बिहार में बाढ़ 2025 ने तबाही के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जहानाबाद, सहरसा और मुंगेर जिला अब जल प्रलय—डूबे गाँव, टूटी सड़कों और उखड़ी उम्मीदों—का दूसरा नाम बन गया है। प्रशासन, ग्रामीण और स्वयंसेवी टीमें—सभी जीवन बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं।

जहानाबाद: दरधा नदी का कहर, बोझिल मोहल्ले और जुझारू लोग

दरधा नदी ने जाफरगंज और अंबेडकर नगर समेत कई इलाकों को अपने गिरफ्त में ले लिया है। कुछ घंटों की बारिश में ही घाटों, गलियों और घरों में पानी घुस गया। पुल के ढहने से लोग कट गए हैं—बच्चों, बूढ़ों और गर्भवती महिलाओं को राशन और दवाएं पहुंचाना मुश्किल हो गया।

स्थानीय निवासी सुनीता देवी कहती हैं, “रात को अचानक पानी आ गया। बच्चों को लेकर छत पर भागना पड़ा। किसी तरह मोबाइल से मदद माँगी, प्रशासन का जवाब देर से आया।”

सहरसा: कोसी की विनाशलीला और पलायन की मजबूरी

कोसी नदी के रौद्र रूप से मातारी, बनगांव, पटुआ, और आसपास के गांव पूरी तरह जलमग्न हैं। करीब 40-50 घर बह गए, दर्जनों परिवार तिरपाल की झुग्गियों या स्कूलों में शरण लिए हैं।
गांव के बुज़ुर्ग रमेश मंडल की आँखों में आंसू—”कोसी तो हर साल ले जाती है, लेकिन इस बार उम्मीद भी डूब गई।”
राहत टीमें जरूर आई हैं, लेकिन जरूरतमंदों तक नाव कभी-कभी ही पहुंचती है।

मुंगेर: टूटा डंगरी नदी पर डायवर्जन, गाँवों का संपर्क टूटा

डंगरी नदी की धार ने अधूरा डायवर्जन सेकंड्स में बहा दिया। मोकामा-बरौनी लाइन का सम्पर्क ठप, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, बीमारों को अस्पताल ले जाना ख्वाब सा लग रहा है।
स्थानीय किसान बबलू पासवान—”हमने खुद लकड़ी की नाव बनाई, 100 से ज्यादा लोग नदी पार फंसे थे। सरकार से बोल-बोल कर थक गए।”

राहत, प्रशासन और जवाबदेही – माहौल में सवाल ही सवाल

  • राहत शिविर कम हैं, खाने-पीने और दवा की व्यवस्था बहुत सीमित।
  • जिन इलाकों में सैकड़ों लोग फंसे हैं, वहां सरकारी नावें या बचाव टीम कम ही दिख रही हैं।
  • कुछ जगह स्थानीय युवाओं और समाजसेवियों ने खुद टैंपू, चाचा-भतीजा टीम बनाकर गॉडाउन से राशन बांटा—उनका जज़्बा काबिल-ए-तारीफ है।

सरकारी प्रतिक्रिया – वादे, चुनौतियां और इलाके की आवाज़

प्रशासन का कहना है कि NDRF, SDRF और प्रशासनिक टीमें लगातार राहत में जुटी हैं—लेकिन स्थानीय लोग शिकायत करते हैं, “प्रशासन हर साल वादा करता है पर बाढ़ से पहले कागज पर ही तैयारी होती है।”
NDRF अधिकारी का बयान—”रिलीफ टीम तैनात हैं, प्रभावितों तक पहुंचने की हर कोशिश हो रही है”—मगर जमीनी हकीकत में सहायता अक्सर देर से पहुंच रही है।

क्या करें? – बाढ़ पीड़ितों के लिए जीवनरक्षक 5 टिप्स

  • ऊँचे स्थानों या सरकारी राहत शिविरों की सही जानकारी रखें—लोकल हेल्पलाइन, WhatsApp ग्रुप, मोहल्ला volunteers से जुड़ें।
  • बिजली के खंभे, टूटे पुलों, खुले तारों से दूर रहें; स्लिपर या चप्पल पहनकर जलमग्न जगह पर जाएं।
  • जरूरी दवाएं, खाने का पैकेट, पहचान पत्र व मोबाइल– एक बैग में रखें।
  • बच्चों और बुज़ुर्गों पर नजर रखें, उन्हें भीड़ या बहाव वाली जगह न भेजें।
  • अगर आप सुरक्षित हैं, तो अपने इलाके के पुराने, बीमार और बेसहारा लोगों की मदद करें—छोटा प्रयास भी कई लोगों की जान बचा सकता है।

FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. बिहार में बाढ़ 2025 किन जिलों में सबसे ज्यादा असर हुआ है?

जहानाबाद, सहरसा, मुंगेर में हालात सबसे गंभीर हैं, साथ में भागलपुर, दरभंगा और समस्तीपुर में भी असर दिख रहा है।

2. सरकार ने राहत के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं?

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमें लगाई गई हैं, अस्थाई राहत शिविर खुले हैं, मगर जरूरत के मुताबिक इंतजाम अब भी अधूरे हैं।

3. क्या बाढ़ से संपर्क मार्ग भी कट गया है?

हां, मुंगेर समेत कई जगहों पर रास्ते डूब/टूट गए हैं—वैकल्पिक यातायात के लिए नाव की मदद ली जा रही है।

4. बाढ़ की स्थिति में सरकारी हेल्पलाइन क्या है?

जल संसाधन आपदा नियंत्रण केंद्र: 1800-3456-121 (टोलफ्री); जिलावार आपदा प्रबंधन अधिकारी से भी तत्काल संपर्क कर सकते हैं।

निष्कर्ष

बिहार की बाढ़ 2025 एक और बड़ा सबक है कि प्राकृतिक आपदा का मुकाबला सिर्फ घोषणाओं से नहीं, लगातार तैयारी, जनता की भागीदारी और सही वक्त पर सही कार्रवाई से होता है।
आप भी अपने इलाके की मदद कहानी या दिक्कत नीचे कमेंट कर साझा करें—शायद आपके अनुभव से किसी संकटग्रस्त को राहत मिले।

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